ओपीडी के 10 % मरीजों के बलगम की होगी जांच

ओपीडी के 10 % मरीजों
के बलगम की होगी जांच
निक्षय दिवस 15 को
- 209 हेल्थ वेलनेस सेंटर सहित पीएचसी, जिला महिला तथा जिला पुरुष चिकित्सालय में होगा आयोजन
- संयुक्त निदेशक डॉ एमपी सिंह ने सीएमओ, डीटीओ के साथ निक्षय दिवस के सफल आयोजन पर किया विचार -विमर्श
जौनपुर, 10 दिसम्बर 2022
जनपद को क्षय रोग मुक्त बनाने की दिशा में विविध प्रयास किए जा रहा हैं। इसी क्रम में अब हर 15 तारीख को आयोजित होने वाले निक्षय दिवस की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
रीजनल टीबी प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (आरटीपीएमओ) के संयुक्त निदेशक डॉ एमपी सिंह, वाराणसी डिवीजन के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) परामर्शदाता डॉ विनोद कुमार, स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट लखनऊ से डॉ विनय कुमार शुक्रवार को जिला क्षय नियंत्रण केंद्र पहुंचे। आलाधिकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ लक्ष्मी सिंह, जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार सिंह से निक्षय दिवस की तैयारी, निजी क्षेत्र में नोटिफिकेशन, निजी चिकित्सकों के प्रोत्साहन और क्षय रोगियों के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के बारे में विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि निक्षय दिवस पर वर्तमान में जिले के 209 हेल्थ एंड वेलनेस केंद्रों, शहरी क्षेत्र के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, जिला महिला और जिला पुरुष चिकित्सालय के साथ सभी स्वास्थ्य इकाइयों के वाह्य मरीज विभाग (ओपीडी) में आने वाले मरीजों के 10 प्रतिशत मरीजों की बलगम की जांच की जाएगी।
जिला क्षयरोग अधिकारी ने बताया कि आशा कार्यकर्ता संभावित टीबी मरीजों की सूची तैयार कर उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक लाएंगी। कम्युनिटी हेल्थ आफिसर (सीएचओ) मरीजों की प्रारम्भिक जांच एचआईवी, डायबिटीज और अन्य जांच करेंगे । साथ ही बलगम का नमूना लेंगे। उसे निक्षय पोर्टल पर आईडी बनाते हुए नजदीकी टीबी जांच केंद्र पर भेजा जाएगा। सीएचओ और आशा के जरिए निक्षय दिवस पर मिलने वाली सुविधाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा । सीएचओ जाँच में टीबी की पुष्टि वाले मरीजों के परिवार के अन्य सदस्यों की भी टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करेंगे। आशा कार्यकर्ता निक्षय दिवस पर टीबी मरीजों के बैंक खाते का विवरण आशा संगिनी को मुहैया कराएंगी और आशा संगिनी सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) को निक्षय पोर्टल पर दर्ज कराने को देंगी। इस दिवस पर प्राइवेट प्रैक्टिशनर को टीबी नोटिफिकेशन, कांटेक्ट ट्रेसिंग और फालोअप के लिए प्रेरित किया जाएगा।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी ( सलिल यादव ने बताया कि राज्य स्तर के निर्देश के तहत पब्लिक सेक्टर के अस्पतालों/डॉक्टरों से 6,000 तथा प्राइवेट के डॉक्टरों/अस्पतालों से 2500 क्षयरोगियों को खोजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मद्देनजर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में अभियान चलाया जा रहा है। शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एनटीईपी की टीमें शहरी क्षेत्रों के साथकेराकत, मछलीशहर, मड़ियाहूं, बदलापुर, डोभी और बरसठी क्षेत्र में निजी सेक्टर के अस्पतालों/डॉक्टरों से नोटीफिकेशन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। क्षयरोगियों के पालन पोषण के लिए दवा, पोषण सामाग्री, जांच आदि सभी मुफ्त हैं। क्षयरोग में सबसे जरूरी बलगम की जांच कराना है। बलगम की जांच में क्षय रोग का पता चलने पर समझना चाहिए कि क्षयरोग है। उन्होंने कहा कि क्षय रोगियों के इलाज के दौरान सरकार 500 रुपए पोषण भत्ता के रूप में देती है ।
प्रधानमंत्री क्षयरोग मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में इस साल अब तक कुल 6,674 क्षय रोगियों का पंजीकरण हुआ है। इसमें 5,697 सरकारी अस्पतालों के हैं जबकि 977 निजी अस्पतालों के हैं। डायरेक्ट बेनीफिसियरी ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 1.49 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स की कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति कम हो जाती है और क्षय रोग से प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।
