Jaunpur news लाखों की लागत से बने पिंक शौचालय में लगा है ताला
लाखों की लागत से बने पिंक शौचालय में लगा है ताला
तहसील परिसर में नहीं है महिला शौचालय, प्रसाधन की समुचित सुविधा
महिला अधिवक्ता और वादकारी प्रतिदिन होते हैं परेशान
मछलीशहर,जौनपुर ।
तहसील परिसर में नगर पंचायत ने वर्षों पूर्व दो पिंक शौचालय तो बनाए हैं, किन्तु दोनों का उपयोग अभी तक आम महिलाएं नहीं कर पा रही हैं। लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए इस शौचालय में बाहर से ताला बंद किया गया है। जब कभी कोई वीआईपी, प्रशासनिक अधिकारी य मंत्री, विधायक आते हैं तो इस ताले को दिखावटी तौर पर खोल दिया जाता है।
उपजिलाधिकारी न्यायिक कोर्ट के सामने बना पिंक शौचालय आज तक खुला ही नहीं है।
महिला अधिवक्ता,वादकारी शौचालय के अभाव में तहसील में इधर उधर भटकती रहती हैं।
नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष शबीना बानो ने अपने कार्यकाल में महिलाओं की सुविधा के लिए तहसील परिसर में पिंक शौचालय बनवाया था।काफी दिनों तक शौचालय में ताला लगा रहा।तीन वर्ष बीतने के बाद भी पिंक शौचालय किसी के उपयोग के लिए खुला ही नहीं।इसके बाद शौचालय का ताला तोड़कर समर्शेबुल, स्टार्टर,विद्युत बल्ब एवं अन्य सामान,टोटी आदि कीमती गायब होता जा रहा है।शौचालय उपयोग न होने एवं देखभाल के अभाव में खंडहर होता जा रहा है।उसके बरामदे का अधिवक्ता,वादकारी मूत्रालय के तौर पर उपयोग कर रहे हैं,जिसके कारण गंदगी का साम्राज्य है।
तहसील की महिला अधिवक्ता सरिता मिश्रा,लाडली बेगम,कविता यादव,प्रिंसी तिवारी,प्रमिला पटेल,मनीषा भारती आदि बताती हैं कि एक शौचालय पर सी ओ ऑफिस के कर्मचारियों का कब्जा है । दूसरे का स्थापना काल से ही उपयोग में नहीं आ सका है।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश चंद्र सिन्हा,नागेन्द्र श्रीवास्तव,रामजी गुप्ता,दयानाथ पटेल,महामंत्री आलोक विश्वकर्मा,अशोक कुमार मिश्रा आदि का कहना है कि महिला वादकारी,दिव्यांग वादकारी के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।तहसील में आए आम जन भी शौचालय की खोज में इधर उधर भटकते रहते हैं लेकिन असफलता ही नजर आती है।
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डीएम के निर्देश पर भी नहीं खुला ताला
मछलीशहर।
शनिवार को समाधान दिवस पर जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र को अधिवक्ताओं ने ज्ञापन दे कर इस अहम मुद्दे को जब उनके समझ उठाया तो उन्होंने इसे बेहद ही गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत विजय कुमार सिंह को कड़ा निर्देश दिया।इसके बावजूद भी सोमवार तक जिलाधिकारी के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। नगर पंचायत द्वारा लाखों खर्च कर बने शौचालय आम जन के उपयोग में नहीं आ रहे हैं लेकिन नगर पंचायत के अभिलेख में गतिशील है। साफ सफाई,मरम्मत का भी पैसा निकल रहा होगा।
