February 21, 2026

ठंड के मौसम में कम वजन वाले नवजात करें ज्यादा देखभालसांस लेने में दिक्कत, देर से रोने जैसे मामलों में भी बरतें खास सतर्कता

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कंगारू मदर केयर से बच्चों का नियंत्रित करते हैं तापमान
मां-बच्चे में बांडिंग भी होती है मजबूत
जौनपुर, 28 नवम्बर 2022
ठंड में नवजात को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। खासतौर पर कम वजन वाले शिशुओं के देखभाल के प्रति और सतर्कता बरतनी चाहिये। इसी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 15 से 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जाता है। यह कहना है अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, आरसीएच डॉ एससी वर्मा का।

डॉ वर्मा ने बताया कि नवजात को मौत से बचाने के लिए हर वर्ष नवजात शिशु देखभाल सप्ताह 15 से 21 नवम्बर तक मनाया जाता है। साथ ही ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ता गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल (एचबीएनसी) कार्यक्रम के तहत नवजात के घर-घर जाकर 42 दिन तक उनकी जांच और देखभाल करती हैं। इसके लिए वह जन्म से लेकर 42 दिन तक कुल सात भ्रमण करती हैं।

जिला महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ दीपक जायसवाल ने बताया कि सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में नौ महीने की अवधि पूरी कर पैदा होने वाले और समय से पहले पैदा होने वाले, दोनों ही तरह के बच्चों की देखभाल की जाती है। इन दोनों ही स्थितियों में पैदा होने के तुरंत बाद बच्चे की साफ-सफाई कर, उसे कपड़े में लपेट कर मां से सटाकर लिटा दिया जाता है। बच्चा पैदा होने पर यदि रो देता है तो उसे स्वस्थ माना जाता है लेकिन उसका वजन 1,800 ग्राम से कम है और रो भी रहा है, तब भी उसे एसएनसीयू में निगरानी में रखा जाता है। ऐसे बच्चों को ठंड ज्यादा लगती है। इसलिए एसएनसीयू में उसे गर्मी देते रहते हैं। ऐसी स्थिति में भी यदि बच्चा आसानी से मां का दूध पी ले रहा है या दूध निगलने में दिक्कत नहीं हो रही है तो उसे मां के स्तन से सटाकर उसे मां के पास लिटाते हैं जिसे कंगारू मदर केयर (केएमसी) कहते हैं। समय से पहले पैदा होने वाले हर बच्चे का केएमसी करवाते हैं। केएमसी बच्चे का ठंड से बचाव करता है। साथ ही मां और बच्चे की बांडिंग मजबूत बनाता है। केएमसी के माध्यम से बच्चे की अच्छी देखभाल हो जाती है। नौ महीने की अवधि पूरी कर पैदा होने वाले बच्चों के प्रसव के समय दिक्कत आने पर उन्हें भी एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। जैसे सांस लेने में दिक्कत (बर्थ एसफिक्सिया), गंदा पानी पी लेना (निकोनियम एस्पीरेशन), देर से रोना (डिले क्राई) आदि स्थितियां दोनों ही तरह के बच्चों में आ सकती है और इन स्थितियों में उन्हें एसएनसीयू में भर्ती कराते हैं। ठंड में बच्चों को एसएनसीयू से डिस्चार्ज करते समय परिवार वालों को समझाते हैं। साथ ही उन्हें डेमो करके दिखाते हैं कि मां बच्चे को केएमसी कराती रहें।
वह कहते हैं कि छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाएं (एक्सक्लूसिवली ब्रेस्ट फीडिंग)। बच्चे को ऊनी कपड़े पहनाना, सिर पर मंकी कैप, हाथ में ग्लब्ज और पैर में मोजे पहनाना ठंड में जरूरी है। मां अपना दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे पर रखकर डकार आने तक थपकी देना। यह प्रक्रिया दोनों ही तरह के बच्चों में कराते हैं, समय से पैदा होने वाले बच्चों में सिर्फ केएमसी नहीं कराते हैं। डिस्चार्ज होने के आठ दिन उसके फालोअप के लिए बुलाकर बालरोग विशेषज्ञ को दिखाया जाता है। बावजूद इसके यदि बच्चा मां का दूध चूसने/निगलने में कमजोर हो, 37.5 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा बुखार हो या शरीर का तापमान 35.5 डिग्री सेंटीग्रेड से कम हो, अत्यधिक रो रहा हो, चिड़चिड़ा हो, तेजी से सांस ले रहा हो (प्रति मिनट 60 से अधिक बार), छाती गंभीर रूप से अंदर खींच रहा हो, किसी भी स्थान से रक्तस्राव, अकड़न या असामान्य गतिविधियां दिखाई दे रही हों आदि। यह स्थितियां खतरे के लक्षण हैं। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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