February 22, 2026

दीपावली आते ही घरौंदा व मंदिर बनाने में जुटे बच्चे

Share


दीपावली के दिन दीपक जलाकर उसी में करते हैं लक्ष्मी पूजन
सिकरारा। इस बात की सही जानकारी नहीं मिलती की दीपावली से पहले घरों के सामने घरौंदा व छोटे मंदिर बनाने का प्रचलन कब से शुरू हुआ लेकिन अब बहुतायत परिवारों के बच्चे अपने घर के सामने दीपावली से पहले घरौंदा अथवा मंदिर बनाकर उसे आकर्षक ढंग से रंग रोगन लगाकर सजाते हैं। दो दशक पहले तक यह कुछ ही घरों के सामने दिखता था परंतु अब शायद ही कोई ऐसा घर मिलेगा जहाँ घरौंदा न बनाया गया हो। इस कार्य मे बच्चों का उसाह देखते ही बनता है। ईंट ,मिट्टी,लकड़ी,रंग,चूना आदि की मदद से ऐसे ऐसे डिजाइन के घरौंदे बनते हैं कि उनकी इंजीनियरिंग देख कर सहसा विश्वस ही नहीं होता कि यह किसी नन्हे मुन्ने के दिमाग की उपज है।अब बिजली के आकर्षक झालरों से सजे घरौंदे लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। इस सम्बंध में इंटर कालेज प्रतालगंज के प्रधानाचार्य व प्रख्यात कवि अशोक मिश्र बताते हैं कि घरौंदा बनाने के पीछे बच्चों की रचनात्मकता मूल कारण है। दीपों के पर्व पर घर के बड़े लोग साफ सफाई व तोरण ध्वज आदि से घरों की सजावट कर दीपावली पर लक्ष्मी पूजन करते हैं।बच्चों में भी यह भाव कहीं न कहीं परोक्ष रूप से रहता है कि हम भी अपना घर बनाकर उसे सजाएं और उसमें दीप जलाकर लक्ष्मी माता का पूजन करें। रचनात्मक प्रकृति हर इंसान के डीएनए में मौजूद होती है।बचपन मे उसका पूर्वाभ्यास देखने को मिलता है। यही बच्चे बड़े होकर अपना घर बनाते हैं उसे सजाते संवारते हैं।

About Author