February 22, 2026

अकेले में करते हैं बात, बिना किसी के बोले सुनाई दे आवाज तो है मानसिक रोग का आगाज

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बेवजह संदेह, अत्यधिक क्रोध, नींद न आना, अकारण दुखी रहना भी मानसिक रोग का लक्षण
मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक, मनोचिकित्सक से परामर्श लेकर इसे किया जा सकता है ठीक
जौनपुर, 09 अक्टूबर 2022
जिला अस्पताल में आए एक व्यक्ति को लगता था कि उसके आस-पास गांव के लोग जादू -टोना कर रहे हैं जिससे उसकी सेहत खराब हो रही है। वह अकेले में खुद से बात करता था। जब कोई नहीं रहता था तब भी उसके कान में आवाजें सुनाई देती थीं।
मन कक्ष के साइक्रेटिस्ट कंसल्टेंट डॉ सुमित कुमार सिंह कहते हैं दरअसल वह सीजोफ्रेनिया (Schizophrenia) का रोगी था। जब कोई बिना वजह संदेह करें, अकेले में खुद से बातें करे, अत्यधिक उत्तेजित या क्रोधित हो, वेश-भूषा और सफाई का ख्याल न रखे, बहुत ज्यादा चुपचाप रहे, लोगों से अलग रहे, नींद न आए, घबराहट-बेचैनी हो, बिना वजह हमेशा दुखी रहे तो यह उसके मानसिक रोगी होने का लक्षण हो सकता है। वह बताते हैं कि लोग अक्सर मानसिक स्वास्थ्य को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं।मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्व दिया है।
डॉ सुमित ने बताया कि किसी का मानसिक स्वास्थ्य तब अच्छा कहा जाएगा जब उसका विचार, भावनाएं, आचरण और उसकी बुद्धिलब्धि उम्र और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप हों। उदाहरण के तौर पर एक 15 वर्ष के मध्यम परिवार में जन्मे बच्चे से अपेक्षाएं होती हैं कि उसके विचार, भावनाएं उस समाज के अनुरूप हों जिसमें वह रहता है। वह अपनी उम्र, समाज और परिवेश के अनुरूप ही आचरण करे। उससे अपेक्षा होती है कि वह अपने घर में बड़ों की इज्जत करे, हमउम्र बच्चों के साथ खेले, समाज के अनुसार पहनावा रखे और समाज के अनुरूप ही खानपान रखे। यदि यही 15 वर्ष का लड़का अमेरिका में रह रहा है तो उससे अपेक्षाएं थोड़ी अलग होंगी। उसका पहनावा, बात करने का तरीका आदि थोड़ा अलग होंगे और अमेरिकी समाज के ज्यादा करीब होंगे।
वह कहते हैं कि विभिन्न प्रकार के मानसिक रोग व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य खराब करते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी अवश्यक है। हालांकि मनोचिकित्सक से परामर्श लेकर यह ठीक किया जा सकता है। मानसिक रोगी की जीवनशैली को सामान्य बनाया जा सकता है। डॉ सुमित कहते हैं कि जिला अस्पताल स्थित मनकक्ष में प्रतिदिन औसतन 20 मरीज आते हैं। इसमें से दो से तीन मरीज प्रतिदिन इस तरह की बीमारी से प्रभावित दिखते हैं।

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