Jaunpur newsसंकट से मुक्ति तथा धन-धान्य की होती है प्राप्ति
संकट से मुक्ति तथा धन-धान्य की होती है प्राप्ति
व्रत पर्व का सुखद संयोग छह जनवरी को प्रीति योग में प्राप्त होगा
मछलीशहर, जौनपुर ।
ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल ने कहा कि
नारदपुराण में माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का विधान बताया गया है। इस वर्ष इस व्रत पर्व का सुखद संयोग छह जनवरी को प्रीति योग में प्राप्त होगा।
उन्होंने बताया कि यह व्रत स्त्रियों द्वारा किया जाता है। इस व्रत में दिनभर उपवास रखकर चंद्रोदय से पूर्व स्नानादि पश्चात स्त्रियां नए वस्त्रों को धारण करती हैं। खुले आसमान के नीचे गोबर से लीपकर चौक पूरा जाता है। पूजन की सारी वस्तुओं को रखकर पूर्ण तैयारी कर चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को लाल चंदन, कुश, दूर्वा, फूल, अक्षत, शमीपत्रादि के द्वारा तांबे के पात्र से अर्घ्य प्रदान किया जाता है। इस व्रत में गौर गणेश व चंद्रमा का पूजन किया जाता है तथा पूजन में चार की संख्या में प्रत्येक वस्तुएं भगवान गणपति को चढ़ाई जाती है।
आचार्य डॉक्टर मोदनवाल ने बताया कि
लालकंद, फल, गुड़, तिल्ली, पान एवं तिल चढ़ाए जाते हैं। गुड़, तिल और घृत की आहुति दी जाती है। चार बत्तियों वाले दीपक के साथ कपूर से भी आरती की जाती है। गणेश जी की चार कथाओं को कहा व सुना जाता है। काले तिल, जल व फूल को हाथ में लेकर चार बार प्रदक्षिणा करते हुए अर्घ्य प्रदान किया जाता है। इस व्रत में गुड़ तिल व लालकंद का विशेष महत्व है। पूजन के पश्चात सिंघाड़े का हलवा, कंद दूध व चाय आदि का फलाहार किया जाता है। इस व्रत के प्रभाव से संकट से मुक्ति मिलती है विघ्न बाधाओं का निवारण होता है तथा परिवार में धन-धान्य व ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
चंद्रोदय – रात्रि 8:35 के बाद है।
