February 22, 2026

जनपद में रिक्त पड़े 17 पदों पर टीबी एसटीएस तैनात प्रशिक्षण

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  • क्षयरोग के लक्षण, जांच, शासन के सूचकांकों, डीबीटी आदि का प्रशिक्षण दिया
  • डीटीओ ने बताया कार्य और दायित्व, क्षयरोगियों को खोजने का दिया निर्देश
    जौनपुर, 05 नवम्बर 2022 । राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में रिक्त पड़े 17 वरिष्ठ चिकित्सा पर्यवेक्षकों (एसटीएस) के पदों पर राज्य स्तर से चयन प्रक्रिया पूर्ण कर उनकी तैनाती कर दी गई है । इस समय सभी ब्लाकों में एसटीएस की तैनाती है ।
    जिला क्षय रोग केंद्र में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) सलिल यादव ने कार्यक्रम के संबंध में आधारभूत जानकारी दी । उन्होंने बताया कि खांसी, बुखार, बलगम, भूख न लगना, वजन कम होना, रात को पसीने के साथ बुखार उतर जाना आदि लक्षणों लक्षणों के आधार पर टीबी के संभावित मरीजों की खोज की जाती है । उन्होंने क्षयरोग के लक्षण, उनकी जांच, शासन के सूचकांकों (जैसे नोटीफिकेशन, यूनिवर्सल ड्रग सक्सेबिलिटी टेस्ट (यूडीएसटी), डायरेक्ट बेनीफिसियरी ट्रांसफर (डीबीटी), मरीजों के आउट कम, कोमार्बिडिटी (शुगर, एचआईवी, टोबैको स्टेटस तथा मरीजों की सहमति इत्यादि) के बारे में जानकारी दी गई ।
    नवनियुक्त एसटीएस को जिला क्षय रोग अधिकारी ने उनके कार्य और दायित्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द नए मरीजों की खोज करने का दायित्व उनके ऊपर है। इसके लिए उन्हें संबन्धित क्षेत्र के समस्त आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का भ्रमण कर क्षयरोगियों को खोजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर हाल टीबी मरीजों की मौत पर काबू पाना हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए उन्हें अपने चिकित्सकीय पर्यवेक्षण में उपचार की अवधि तक बिना रुकावट के दवा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही मरीजों के नियमित रूप से दवा लेने पर भी निगाह रखनी होगी। इसके लिए समय-समय पर उनका फालोअप लेना होगा। उनके निकट सम्पर्क में रहने वाले लोगों की भी टीबी की जांच करानी होगी। मरीजों के खाते में समय से 500 रुपए की धनराशि का पहुंचना सुनिश्चित कराना पड़ेगा। मरीजों को पोषण सामाग्री दिलवाने के लिए क्षेत्र में निक्षय मित्र का चयन करवाना भी जरूरी कार्य है।
    उन्होंने बताया कि टीबी नोटीफिकेशन के मामले में जिला क्षय रोग क्लीनिक अग्रणी है जबकि मछलीशहर और रामपुर ने भी अच्छा कार्य किया है जिसकी डीटीओ ने प्रशंसा की । वहीं डोभी और रामनगर को मेहनत कर अपना प्रदर्शन सही करने का निर्देश दिया। सबसे ज्यादा डीबीटी 91% धर्मापुर ब्लाक में तथा सबसे कम 63% सुजानगंज में हुआ है । बैठक में कम उपलब्धि वाले ब्लाकों को चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के अंदर समस्त सूचकांकों में सुधार लाने का निर्देश दिया । वर्ष 2025 तक क्षय मुक्त भारत बनाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम और आशा कार्यकर्ता के माध्यम से संभावित क्षयरोगियों की जांच कर नजदीकी टीबी यूनिट में रेफर कर उपचार करवाने का निर्देश दिया।

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