February 22, 2026

जौनपुर का नाम बदलने और अटाला मस्जिद मुक्ति की मांगआचार्य कौटिल्य प्रगतिशील मंच विचार संगोष्ठी संपन्न

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जौनपुर का नाम बदलने और अटाला मस्जिद मुक्ति की मांग
आचार्य कौटिल्य प्रगतिशील मंच विचार संगोष्ठी संपन्न

जौनपुर। जिले में एक बार फिर जौनपुर का नाम बदलने व अटाला को पुनः निर्माण मुक्ति का आवाज अब तेजी से उठने लगी है। बुधवार को आचार्य कौटिल्य प्रगतिशील मंच द्वारा आयोजित विचार संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में अधिवक्ता सुप्रीमकोर्ट अश्वनी कुमार उपाध्याय ने अटाला मस्जिद व जौनपुर के नाम को यमदग्निपुरम करने की मांग को उठाया। रामराज्य और भारतीय संविधान विषयक यह विचार गोष्ठी नगर के एक होटल में आयोजित थी।
उन्होंने कहा कि जनपद जौनपुर का पुराना नाम ‘यमदग्निपुरम्ï’ है और अटाला मस्जिद ‘अचला देवी’ का मन्दिर है। उस समय की परिस्थितियों में हमारे पूर्वजों ने विरोध किया होगा लेकिन सफल नहीं हुए। आज उस कलंक को धोने का समय आ गया है, मैं कानून के माध्यम से और जौनपुर के सभी लोग सडक़ के माध्यम से इसके लिए संघर्ष करें।
श्री उपाध्याय ने कहा कि अपनी आवाज को देश के शासकों से मनवाने के लिए तीन तरीके पहला-सुप्रीम कोर्ट, दूसरा-सदन, तीसरा-सडक़। सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, सडक़ी की जिम्मेदारी जनमानस को लेनी पड़ेगी।
मुख्य अतिथि ने कहा कि सन्ï 1992 में कांग्रेस सरकार ने मॉइनारिटी कमीशन एक्ट लाया जिसमें देश को अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दो भागों में विभक्त कर दिया। जिसमें हिन्दू बहुसंख्यक हो गये और मुस्लिम अल्पसंख्यक। इस कानून का एक खतरनाक पहलू यह भी था कि हिन्दुओं को भी सिख, जैन, बौद्घ में बाँट दिया गया और इसमें भी हिन्दु बहुसंख्यक और सिख, जैन, बौद्घ अल्पसंख्यक हो गये, उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को आपस में बाँटकर कमजोर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो० डॉ० दिनेश चन्द्र उपाध्याय ने कहा कि परिस्थितियों को बदलकर रामराज्य की प्राप्ति की जा सकती है। उदाहरण देकर समझाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दो लोक सभा सांसद से चलकर दो सौ बयासी और अब तीन सौ तीन सांसद की पार्टी बनी। उन्होंने देश की नब्ज को समझा और रामराज्य की कल्पना को साकार करने के लिए कई कानून बनाया। प्रोफेसर उपाध्याय ने बोलते हुए कहा कि भारत की संस्कृति को कुछ लोगों ने आठ सौ साल पुरानी ही मान रहे हैं जबकि हम उस समय गुलाम थे और उस समय शासकों का प्रभाव हमारी संस्कृतियों पर पड़ा अगर हमारा संविधान भारत के मूलीभूत संस्कारों को लेकर बनाया गया होता तो आज रामराज्य की परिकल्पना को प्राप्त कर लिया गया होता।
कार्यक्रम के संयोजक सुशील कुमार उपाध्याय ने उपस्थित जनों का स्वागत और विषय परिचय कराते हुए, कहा कि आचार्य कौटिल्य ‘‘चाणक्य’’ पहले महामानव थे जिन्होंने अखण्ड भारत की परिकल्पना की थी और उन्होंने मलेक्ष आततायियों से लडऩे के लिए सभी राजाओं को संगठित होने के लिए एकत्र किया और भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार थे जो अपने स्वयं के सातवें अवतार से मुलाकात की थी और सनातन धर्म के अनुसार आज भी वे पृथ्वी पर मौजूद हैं।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत भगवान परशुराम और आचार्य कौटिल्य के चित्र पर माल्यार्पण करके की गयी। कार्यक्रम का संचालन डॉ० अजय कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में डॉ० मनोज मिश्र, मधुकर तिवारी, डॉ० सुरेन्द्र कुमार उपाध्याय, डॉ० नृपेन्द्र सिंह, एडवोकट रवीन्द्र नारायण सिंह, विजय प्रकाश तिवारी, सुभाष शुक्ला, पंकज मिश्र, एडवोकेट यादवेन्द्र मिश्र, राजकृष्ण शर्मा, अजीत प्रजापति, महेन्द्र विजय शुक्ला, प्रकाश शुक्ला, कृष्ण कुमार दूबे, रवीन्द्र मिश्र, संतोष दूबे, अरविन्द उपाध्याय, रमेश दूबे, सतीश कुमार गौड़ आदि उपस्थित रहे।

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