अल्जाइमर के प्रति जागरूकता बढ़ाएँ, मरीजों का सहयोग करे

सीएमओ कार्यालय में मनाया गया विश्व अल्जाइमर दिवस
- गोष्ठी में रोग के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में दी जानकारी
- उठने, नहाने, धोने, कपड़े पहनने, खाना खाने आदि का ध्यान नहीं रहना हैं बीमारी के लक्षण
जौनपुर, 21 सितंबर 2022 । विश्व अल्जाइमर दिवस पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में बुधवार को गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें इस रोग के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ लक्ष्मी सिंह ने बताया कि विश्व अल्जाइमर दिवस हर वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। सन 1994 से लगातार इस दिवस को मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य है कि लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और इसके मरीजों का सहयोग किया जा सके ।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ राजीव कुमार ने बताया कि अल्जाइमर डिमेंशिया (याददाश्त कम होने वाली बीमारी)का एक प्रकार है। इस रोग से पीड़ित मरीज में अपने दैनिक कार्यों को करने की समझ कम हो जाती है। उसे उठने, नहाने, धोने, कपड़े पहनने, खाना खाने और मिलने जुलने का ध्यान नहीं रहता। इन कार्यों को करने की समझ और क्षमता दोनों कम हो जाती है। डिमेंशिया के कई प्रकारों में अल्जाइमर भी एक है। 80 प्रतिशत तक डिमेंशिया अल्जाइमर के कारण है जबकि फ्रंटोटिम्पीरल और लेवीबाड़ी डिमेंशिया सहित अन्य तरह की भी डिमेंशिया होती है।
मनकक्ष के साइक्रेटिस्ट कंसल्टेंट डॉ सुमित कुमार सिंह बताते हैं कि ज्यादातर डिमेंशिया 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होता है लेकिन कम उम्र लोग भी इससे प्रभावित होते देखे जा रहे हैं। यह धीरे -धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जिसकी पहचान सामान्यतया छह महीने बाद हो पाती है।
बीमारी के संकेत: जब किसी को रिश्तेदार और जान-पहचान के लोगों का नाम याद न रहे, जाने-पहचाने रास्तों पर भटक जाए, स्वयं से रखी चीज को याद न कर पाए, अपने शर्ट की बटन ठीक से न लगा पाए तो समझ लेना चाहिए कि यह अल्जाइमर के शुरुआती संकेत हैं। जिन्हें अपने घर के 60वर्ष के लगभग या उससे अधिक उम्र के लोगों में यह लक्षण दिखें उन्हें इस संबंध में मनोचिकित्सक से परामर्श जरूर लें लेना चाहिए। जब रोग गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है तो प्रभावित इंसान अपने दैनिक कार्यों को स्वयं से बिल्कुल नहीं कर पाता है। वह नहाने, खाना खाने, कपड़ा धोने में असमर्थ हो जाता है। उसे छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा गुस्सा आता है। अपशब्दों का भी प्रयोग करने लगता है। वह सामाजिक नियमों का पालन नहीं करता है। बाहर जाते समय बिना कपड़े या चप्पल के निकल जाता है, खुले में कहीं भी पेशाब या शौच कर देता है। नींद न आना जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
वह बताते हैं कि अल्जाइमर होने के कई कारण होते हैं। आनुवंशिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है। आसपास का परिवेश या शिक्षा में कमी सहित कई अन्य कारणों से यह रोग हो सकता है। या यह सारे कारण एक दूसरे से मिलकर भी रोग का कारण बन जाते हैं।
क्या करना चाहिए: डॉ सुमित बताते हैं कि जब इस रोग के प्राथमिक संकेत मिलने लगें तभी मनोचिकित्सक से मिलकर इसका इलाज शुरू कर देना चाहिए। हालांकि इस रोग को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन रोग को गंभीर अवस्था में पहुंचने से बचाया जा सकता है। ऐसे मरीजों को कभी भी अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। बराबर मनोचिकित्सक के सम्पर्क में बने रहना चाहिए।
कैसे बचाव हो सकता है: सोचने समझने की शक्ति में हल्का सा भी परिवर्तन होने पर मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। ऐसे मरीजों को परिवार के बीच रखना चाहिए। मदपान व धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। भारत में 50 लाख के करीब अल्जाइमर के मरीज होने का अनुमान है।
