प्रोटीनयुक्त पौष्टिक आहार के सेवन से सुधरेगा टीबी मरीजों का स्वास्थ्य

प्रोटीनयुक्त पौष्टिक आहार के सेवन से सुधरेगा टीबी मरीजों का स्वास्थ्य
क्षय उन्मूलन अभियान
- 3,014 मरीजों को संस्थाओं से मिली पौष्टिक आहार किट, भावनात्मक सहयोग से उपचार पूर्ण कर हुए स्वस्थ
- दो साल में 3,675 टीबी मरीज चिन्हित, वर्तमान में 4,376 क्षयरोगी उपचारित
जौनपुर, 15 सितंबर 2022।
जिले में 4,376 क्षय रोगी उपचारित हैं। वर्ष 2020 से 2022 के बीच अब तक कुल 3,675 टीबी रोगियों को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान से जोड़ा गया है। इसमें 3,014 मरीज स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं के जरिए पौष्टिक आहार किट, भावनात्मक सहयोग से पूर्ण स्वस्थ हो चुके हैं। यह कहना है जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार सिंह का। उन्होंने बताया कि देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कम्युनिटी सपोर्ट टू टीबी पेशेंट की शुरुआत की। इसके तहत टीबी रोगियों के बेहतर पोषण के लिए निक्षय मित्र के रूप में पंजीकरण कराते हुए प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार टीबी जैसे संक्रामक रोग का व्यक्ति के पोषण से गहरा नाता है। उचित पोषण न मिल पाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने से टीबी का संक्रमण बीमारी का रूप ले लेता है। इसलिए टीबी मरीजों के बेहतर पोषण और दवा का पूरा कोर्स का उपचार करवाने में क्षय रोगियों को गोद लेने वाली संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। उपचाराधीन समस्त क्षय रोगियों को निक्षय पोषण योजना के तहत केंद्र सरकार प्रतिमाह 500 रुपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के रूप में सीधे उनके खाते में भेज रही है।
क्षय उन्मूलन अभियान के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) सलिल यादव ने बताया कि इस योजना की शुरुआत से अब तक छह करोड़ से ज्यादा की धनराशि क्षय मरीजों के खाते में डीबीटी के रूप में भेजी जा चुकी है। इसी क्रम में वर्ष 2022 में प्रथम किस्त के रूप में 58.50 लाख की धनराशि तथा द्वितीय किस्त के रूप में 55 लाख की धनराशि क्षयरोगियों के खाते में डीबीटी के रूप में भेजी गई है। नौ सितंबर 2022 से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत करते ही जनपद को टीबी मुक्त बनाने के लिए कार्यक्रम में समस्त गतिविधियां तेजी से संचालित की जा रही हैं। निक्षयमित्र के रूप में क्षयरोगियों को सहायता प्रदान करने के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा पोर्टल पर निक्षयमित्र के रूप में पंजीकरण कराने, क्षयरोगियों से पोषण सामाग्री लेने के लिए सहमति पत्र भराने, जनपद में चयनित टीबी चैम्पयन्स को उपचारित टीबी मरीजों को प्रेरित कर उनका मनोबल बढ़ाने के लिए कार्य कराने, वर्तमान में उपचारित समस्त क्षयरोगियों को गोद लिये जाने, निक्षय पोषण योजना की धनराशि उनके खाते में भेजे जाने आदि कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्ग दर्शन में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो निर्मला एस मौर्या के माध्यम से 17 सितंबर 2022 को कुल 72 क्षयरोगियों को गोद लिया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में जनपद के 185 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से नए टीबी मरीजों की खोज करने के लिए जनपद की प्रत्येक आशा कार्यकर्ता 23 अगस्त से 30 सितंबर के मध्य प्रतिदिन कुल 15 घरों का सर्वे कार्य कर रहीं हैं। इसमें 23 अगस्त से पांच सितंबर के बीच लगभग 17 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करते हुए कुल 690 लोगों का बलगम परीक्षण कराया गया जिसमें कुल सात नए टीबी मरीजों की खोज कर उनका उपचार शुरू कर दिया गया है।
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ राकेश कुमार सिंह ने जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को निर्देशित किया है कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जनपद को टीबी मुक्त करने के लिए सर्वप्रथम एक -एक गांव/वार्ड का चयन कर लें और उसे टीबी मुक्त करने का प्रयास करें। टीबी मरीजों के गहन सम्पर्क में रहने वाले उनके पारिवारिक सदस्यों की भी टीबी की जांच कराएं। टीबी मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य केंद्रों को देने वाली आशा कार्यकर्ता को प्रति टीबी मरीज 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
