February 3, 2026

स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता से स्क्रब टायफस नियंत्रित

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सफलता
चार गांवों में संभावित मरीजों पर रखी निगरानी, दो सप्ताह से नहीं मिले हैं मरीज
1,773 गोष्ठियों के जरिए लाई जागरूकता और 11 मरीजों का किया उपचार

जौनपुर, 20 दिसम्बर 2022
स्वास्थ्य विभाग की आक्रामक रणनीति के चलते जनपद में स्क्रब टायफस बीमारी फिलहाल नियंत्रित हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दो माह से कोई मरीज नहीं मिला है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ लक्ष्मी सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य टीम ने अन्य दो विभागों के साथ मिलकर लगातार दो माह निगरानी की। फिर चार गांवों में सर्वेक्षण अभियान चलाया और 35 संभावित मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर जांचें। इस प्रयास से जिले में कुल 11 लोगों में स्क्रब टायफस का पता चला। इसके बाद झाड़ियों की सफाई, एंटी लार्वा छिड़काव कराने के साथ रोडेंट रैट की बिलें बंद करावाई। 1,773 गोष्ठियों के जरिए लोगों में जागरूकता फैलाई।
सीएमओ ने बताया कि सफलतापूर्वक दो इनक्लूबेसन पीरियड पूरा कर लेने के बाद अब स्क्रब टायफस का मामला बंद करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इनक्लूबेसन पीरियड वह समय होता है जितने दिन तक वायरस से प्रभावित होने के बाद भी मरीज में रोग के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ओरिएन्टेना सुसुगैमी बैक्टीरिया से प्रभावित होने के बाद भी मरीज के शरीर में स्क्रब टायफस के लक्षण दिखने में एक सप्ताह का समय लग जाता है। जनपद में 27 नवम्बर को मछ्लीशहर में 9 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। इसमें एक व्यक्ति के पाज़िटिव होने का पता तीन दिसम्बर को बीएचयू से मिली रिपोर्ट में चला। तब से दो इनक्लूबेसन पीरियड बीत चुके हैं। इसलिए अब इस मामले को बंद करने की प्रक्रिया चल रही है।

जिला मलेरिया अधिकारी भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि स्क्रब टायफस होने तथा फैलने में वातावरणीय परिस्थितियां विशेष जिम्मेदार होती हैं। 1-बीमारी का कारक ओरिएन्टेना सुसुगैमी बैक्टीरिया, 2-किलनी (चीगर), 3-हाईसेन्थस झाड़ियां, 4-रोडेन्ट रैट (घरेलू चूहे जैसे चूहा, नेवला, छछूंदर) का मानव सम्पर्क में आना, इन चार माध्यमों से बीमारी होती और फैलती है। इनमें से कोई भी एक कारक नहीं मिलने पर बीमारी फैल नहीं पाती है।

कैसे फैलती है बीमारी: ओरिएन्टेना सुसुगैमी संक्रमित किलनी जब किसी को काटती है तो उसके रक्त को ओरिएन्टेना सुसुगैमी से संक्रमित कर देती है। काटने के एक सप्ताह तक (इनक्लूबेसन पीरियड) पता नहीं चलता। उसके बाद बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं। प्रभावित व्यक्ति को ठंड और कम्पन के साथ बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, कभी-कभी शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। इसे पहचानने का सबसे अच्छा तरीका किलनी के काटने वाले स्थान पर काला निशान बन जाता है।

यह रणनीति: बीमारी के कारक चारों वातावरणीय परिस्थितियों की श्रृंखला तोड़ने के लिए बीमार लोगों का इलाज कर बैक्टीरिया खत्म करना, झाड़ियों की साफ-सफाई, चूहों के बिलों को बंद कराकर इनके वाहक किलनी (चीगर) और चूहों पर नियंत्रण करना जरूरी होता है। 
स्वास्थ्य विभाग ने क्या किया: जनपद में स्क्रब टायफस के कुल 11 रोगी मिले। इसमें से सात बरसठी से, दो मछलीशहर से और एक-एक बख्शा और सिरकोनी से थे। जानकारी होते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित चारों गांवों में पहुंच कर लोगों का सर्वे किया। संभावित 35 मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच की। इस काम में 19 आशा, 5-संगिनी, 5-डाक्टर, 3-एलटी, 4-एलए, 2-बीपीएम, 3-बीसीपीएम, 2-स्टाफ नर्स, 1-एएनएम कुल मिलाकर 44 स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगाए गए। इसके माध्यम से जनपद में कुल 11 लोगों के प्रभावित होने का पता चला। उनका इलाज कर उन्हें स्वस्थ किया गया। पूरे गांव में डाक्सी साइक्लीन और पैरासिटामोल दवा वितरित कराई गई। आशा कार्यकर्ता के माध्यम से लगातार सात दिन तक हर घर की निगरानी रखी। दो माह तक संभावित मरीजों में स्क्रब टायफस होने की निगरानी कराई जाती रही और कोई मरीज नहीं मिला। इस तरह से बीमारी पर काबू पाया गया। 

पंचायतीराज विभाग ने क्या किया: जिला पंचायतराज अधिकारी (डीपीआरओ) संतोष कुमार ने बताया कि चिह्नित ग्राम पंचायत में मरीज के घर के दो सौ मीटर की परिधि में आने वाले तालाब के किनारे तथा अन्य स्थानों पर झाड़ियां कटाई गईं, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी लार्वा का झिड़काव कराया गया। जहां पानी का जमाव दिखा वहां डीजल डलवाया गया।
कृषि रक्षा विभाग: जिला कृषि अधिकारी केके सिंह ने बताया कि बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए बरसठी में 88, सिरकोनी में 73, बख्शा में 99, मछलीशहर में 92 सहित जनपद के सभी 21 ब्लाकों में कुल 1,773 गोष्ठियां कराईं गईं। चूहों और छछूंदर को खत्म करने के लिए आवासीय क्षेत्रों में जहरीला चारा रखवाया गया। सर्वे कर बिल चिह्नित कर उसे बंद करवाया गया। बिल बंद करवाने के अगले दिन फिर से जांचा गया जो खुले थे मतलब वहां चूहे थे। इसलिए वहां एल्यूमीनियम फास्फाइड या जिंक फास्फाइड डालकर बिल बंद करवाया गया। लोगों को मच्छररोधी पौधे तुलसी, गेंदा, लेमनग्रास लगाने के लिए प्रेरित किया गया।

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