एक दिसम्बर को होंगे एड्स जन जागरूकता कार्यक्रम

एक दिसम्बर को होंगे एड्स जन जागरूकता कार्यक्रम
- एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सीडीओ ने लिया निर्णय
- गर्भवती के लिए एचआईवी जांच जरूरी, 600 से 800 की जांच में एक महिला के पाज़िटिव होने संभावना
जौनपुर, 19 नवम्बर 2022 । राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में मेनस्ट्रीम कार्यक्रम के तहत उन्मुखीकरण कार्यशाला हुई । इसमें मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) साईं तेजा सीलम ने एक्वायर्ड इम्युनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाने वाले कारकों के प्रति जागरूकता के लिए विश्व एड्स दिवस यानि एक दिसम्बर को जन जागरूकता कार्यक्रम कराने का निर्णय लिया ।
सीडीओ ने प्रभावित करने वालों को भी मेनस्ट्रीम में जोड़ने की बात कही । कार्यशाला की शुरुआत में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ राकेश सिंह ने एड्स नियंत्रण के जनपद में हुए प्रयासों के बारे में लोगों को अवगत कराया । प्रशिक्षक डॉ सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस समय दुनिया में 2.5 मिलियन ह्यूमन इम्युनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संक्रमित हैं । साल 1981 में अमेरिका के कैलीफोर्निया में पहला एड्स का मरीज पाया गया था । भारत में साल 1986 में पहला मरीज़ चिह्नित हुआ । यह एक सामाजिक मुद्दा है । जब तक सभी मिलकर प्रयास नहीं करेंगे तब तक एचआईवी संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सकता । जांच और इलाज में देरी होने से यह एड्स में बदल जाता है जिससे प्रभावित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधी क्षमता घटने लगती है । कोई बीमारी हो जाने पर ठीक नहीं होती। वजन कम होने लगता है और त्वचा खुरदुरी होने लगती है । गिल्टियां निकलने लगती हैं । ऐसी स्थिति में तुरंत इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) जाकर जांच करानी चाहिए । उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए ही सभी विभागों को इकट्ठा किया गया है । जानकारी ही इसका बचाव है।
जिला महिला अस्पताल में परामर्शदाता सीमा सिंह ने कहा कि यदि कोई गर्भवती अस्पताल आ रही है तो सबसे पहले उसे एचआईवी जांच करानी चाहिए । 600 से 800 महिलाओं की जांच एक महिला एचआईवी पाज़िटिव होने संभावना होती है । यदि महिला की सही समय पर जांच हो गई और जांच में वह पाज़िटिव निकल आई है । ऐसी स्थिति में उसका वायरस लोड कम करके उसके बच्चे को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है । कार्यक्रम को एसीएमओ डॉ राजीव कुमार, डीपीसी सलिल यादव आदि ने भी संबोधित किया । कार्यशाला में एड्स प्रभावित पांच ब्लाकों से स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस), शिक्षा, नगर पालिका के अधिकारियों ने भाग लिया ।
