February 21, 2026

दूर करनी होगी नियमित टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियां कार्यशाला

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  • ब्लॉक रिस्पांस टीम तथा स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन के लिए दी जानकारी
  • सीएमओ ने टीकाकरण का लाभ दिलाने के लिए विभिन्न विभागों से तालमेल को ज़रूरी बताया
    जौनपुर, 15 नवम्बर 2022 । नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जिला चिकित्सालय सभागार में सोमवार को ब्लॉक रिस्पांस टीम (बीआरटी) तथा मंगलवार को स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की जनपद स्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला हुई । इसमें बच्चों के नियमित टीकाकरण में बीआरटी तथा हेल्थ सुपरवाइजरों की भूमिका और सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन के बारे में जानकारी दी गई।
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ लक्ष्मी सिंह ने कहा कि कोई भी बच्चा नियमित टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए । बच्चों का नियमित टीकाकरण कराकर उनका उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प लिया है । जिन समुदायों में आवास, राशन कार्ड, राशन वितरण आदि की समस्या है, वहां उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पंचायती राज, बाल विकास एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस), शिक्षा, खाद्य एवं रसद आदि विभागों के साथ समन्वय बनाकर कर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित कराने का भी प्रयास करना होगा। साथ ही टीकाकरण का महत्व भी बताना होगा‌। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नरेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। सही समय पर नियमित टीकाकरण कराना बहुत जरूरी है। एक भी बच्चा छूट जाएगा तो सुरक्षा चक्र टूट जाएगा। पांच वर्ष में सात बार हर बच्चे का टीकाकरण होना अनिवार्य है।
    यूनिसेफ के रीजनल कोऑर्डिनेटर प्रदीप कुमार ने बताया कि विभिन्न विभागों के समन्वय से आसानी से टीकाकरण कराया जा सकता है। हमें समय-समय पर समुदाय आधारित गतिविधियां करनी चाहिए जिससे लोगों को टीकाकरण से होने वाले फायदे के बारे में पता चल सके। जिला समन्वयक गुरदीप कौर ने बताया कि हर ब्लॉक में बीआरटी का गठन किया गया है। इस टीम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी टीकाकरण को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करना है। जहां भी बच्चों के टीकाकरण में भ्रांतियां, झिझक आड़े आ रही है और बच्चों के परिजन टीकाकरण करवाने से इनकार कर रहे हैं, वहां पर बीआरटी को जाना होगा। वहां के ग्राम प्रधान, कोटेदार, इमाम, मौलवी, धर्मगुरुओं को साथ लेकर आमलोगों में टीकाकरण से होने वाले फायदों के बारे में बताना होगा। उन्हें यह एहसास कराना होगा कि यह टीके 12 जानलेवा बीमारियों से बच्चों को बचाते हैं। जो बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट जाते हैं, वह इन घातक बीमारियों के कभी भी शिकार हो सकते हैं। इनकार करने वाले कुछ परिवार ऐसे भी होंगे जो बताएंगे कि उन्हें राशन नहीं मिलता है। कुछ कहेंगे कि टीकाकरण कराने से उनके बच्चे बीमार हो जाते हैं। टीकाकरण कराने से घाव हो जाता है। कुछ बताएंगे कि उन्हें कॉलोनी नहीं मिली। कुछ कहेंगे कि टीका लगने से नपुंसकता आती है। उन्हें बताना होगा कि आपकी यह सोच भ्रम है। टीकाकरण नहीं कराया तो बच्चे क्षयरोग, हेपेटाइटिस-बी, पोलियो, कालीखांसी, डिप्थीरिया, टिटनेस, इन्फ़्लुएन्ज़ा टाइप-बी (हिब इंफेक्शन), निमोनिया, दस्त, खसरा, रुबेला और दिमागी बुखार जैसी 12 जानलेवा बीमारियों के कभी भी शिकार हो सकते हैं। कार्यशाला का समापन बीएमसी अवधेश कुमार तिवारी ने किया। बीएमसी एसएम नेट यूनिसेफ ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए किया।

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