February 22, 2026

आशाओं को बताया-कैसे पहचानें नवजात में खतरे के लक्षण शिशु स्वास्थ्य

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  • सीएचसी जलालपुर में आशाओं को एचबीएनसी के बारे में दी जानकारी
  • हाथ धुलने, तापमान नापने, वजन करने और सांस अवरुद्ध होने पर देखभाल करने का ढंग बताया
    जौनपुर, 10 नवम्बर 2022। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जलालपुर में 17 अक्टूबर से नौ नवम्बर तक आशा कार्यकर्ताओं के तीन बैच का प्रशिक्षण हुआ। इसमें उन्हें माड्यूल 6 और 7 के तहत प्रसव के बाद गृह आधारित नवजात की देखभाल (एचबीएनसी) के बारे में जानकारी दी गई। हर बैच में 30-30 आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण लिया।
    चिकित्सा अधीक्षक डॉ आलोक कुमार सिंह ने नवजात शिशु में खतरे के संकेतों को पहचान कर शिशु को सीएचसी रेफर करने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब शिशु स्तनपान करने में असमर्थ हो, खानपान पर उल्टी कर दे, शरीर में ऐंठन हो, सुस्त/बेहोश हो तो यह स्थितियां खतरे का संकेत करतीं हैं। ऐसी स्थिति स्थिति में उसे तुरंत सीएचसी रेफर कर देना चाहिए।
    चिकित्साधिकारी डॉ प्रवीन सिंह ने बताया कि नवजात के घर पहुंचने पर आशा कार्यकर्ता की सबसे पहली जिम्मेदारी साबुन और पानी से अपना हाथ धुलने की है। इसके लिए सुमन-के विधि का प्रयोग करना चाहिए। ‘सुमन-के’ (SUMAN-K) फार्मूला का ध्यान रखना सभी के लिए बहुत जरूरी है। इसके हर अक्षर में हाथ धोने के वह गूढ़ रहस्य छिपे हैं जो कि हाथों को वायरस या बैक्टीरिया से मुक्त करने में पूरी तरह कारगर हैं । इसके मुताबिक़ ‘स’ का मतलब है कि पहले सीधा हाथ धुलें, ‘उ’ का मतलब है कि उल्टी तरफ से हाथ धुलें, ‘म’ का मतलब है कि मुठ्ठियों को अन्दर से धुलें, फिर ‘अ’ का मतलब है कि अंगूठों को धुलें, ‘न’ बताता है कि नाखूनों को रगड़-रगड़ कर अच्छे से धुलें क्योंकि नाखूनों में आसानी से मैल जमा हो सकती है और आखिर में ‘के’ का मतलब है कि उँगलियों के बाद कलाई को भी धुलना बहुत जरूरी है। इस तरह हर आधे घंटे पर कम से कम 40 सेकेण्ड तक हाथ धुलना चाहिए।
    स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (एचईओ) राकेश कुमार चौबे ने थर्मामीटर से नवजात का तापमान मापने, वजन मशीन के माध्यम से वजन करने, शिशु को कंबल में लपेटने का तरीका बताया। प्रशिक्षकों ने सांस अवरुद्ध हो जाने पर म्यूकस एक्सट्रैक्टर मशीन से बच्चे की नाक और मुंह साफ करने का ढंग बताया। साथ ही दस्त, बुखार आदि से बचाव व मलेरिया जैसे संक्रमण से उनका बचाव करने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चार्ट के अनुसार बालक-बालिकाओं में कुपोषण के स्तर का पता लगाने के बारे में भी बताया। गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के संजय कुमार सिंह और दिनेश कुमार सिंह ने भी आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में जलालपुर, नेहरू नगर, केराकत और रामनगर की आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं।
    जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) डॉ नरेन्द्र सिंह ने बताया कि जनपद में 0-1 वर्ष तक के 1,14,160 बच्चे हैं तथा 1,34,899 गर्भवती हैं। 0-5 वर्ष तक 5.50 लाख बच्चे हैं। इनका नियमित टीकाकरण सप्ताह में दो दिन हर बुधवार और शनिवार को होता है।

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