February 22, 2026

थानाध्यक्ष पर गिर सकती है गाज, नोटिस जारी

Share

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की सुरक्षा में हुए चूक के मामले में जाँच के दौरान जलालपुर थानाध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह भी दोषी पाए गए हैं। इनके नाम से विभाग ने 14 (1) की नोटिस भी जारी कर दिया है। नोटिस जलालपुर थाने पर तैनात दो महिला कांस्टेबल के नाम से भी जारी हुआ है। इस मामले में पहले ही जलालपुर पर तैनात दो एसआई सहित 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ के 9 सितंबर को मेडिकल कॉलेज जौनपुर भ्रमण के दौरान मेन गेट पर फ्लीट निकलते समय एक व्यक्ति गाड़ी के एकदम करीब आकर नारेबाजी करते हुए काली पन्नी दिखाया था। मुख्यमंत्री के सुरक्षा में हुई चूक के मामले में पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने ड्यूटी पर तैनात 2 उपनिरीक्षकों सहित कुल 8 लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और जांच बैठा दी गई थी। जांच में प्रथमदृष्टया मेन गेट के सामने रूट व्यवस्था के प्रभारी थानाध्यक्ष जलालपुर जितेंद्र बहादुर सिंह को भी प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था न कर पाने का जिम्मेदार पाते हुए/ दोषी ठहराते हुए 14 (1) के अंतर्गत नोटिस जारी की गई है।

बड़े अधिकारी बचा रहे हैं अपना गला, छोटो पर गिरा रहें है गाज।

जौनपुर। जौनपुर मेडिकल कॉलेज के भ्रमण के दौरान यूपी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा में 9 सितंबर को हुई भारी चूक के मामले में विभागीय सूत्रों की मानें तो /नाम न बताने की शर्त पर विभागीय लोगों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के इनर आउटर कार्डन प्रभारी दिव्य प्रकाश सिंह सहित अन्य उच्चाधिकारियों को बचाने के प्रयास में निम्न कर्मचारियों पर कार्यवाही की जा रही है क्योंकि मुख्यमंत्री के गाड़ी के पास पहुंचने के लिए किसी व्यक्ति को तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ना पड़ेगा। वह व्यक्ति पहले इनर आउटर कार्डन और रस्सा टीम को क्रास किया होगा उसके बाद मुख्यमंत्री जी के गाड़ी के पास पहुंचा होगा। परंतु इन 2 लेयर के लिए जिम्मेदार लोगों को न केवल बचाने का प्रयास किया जा रहा है अपितु एक कहावत है कि “आपदा उच्चाधिकारियों के लिए अवसर लेकर आती है” कहीं न कहीं सत्य प्रतीत होती है क्योंकि प्रभारी लोगों सहित 2 लेयर के लोगों को छोड़कर केवल कुछ लोगों के खिलाफ ही कार्यवाही करके उच्चाधिकारी इसे अवसर के रूप में भुना रहे हैं।अब देखना यह है कि प्राथमिक जांच के बाद क्या अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्यवाही होती है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने में सहायता मिले या केवल कुछ लोगों को ही बलि का बकरा बना कर इतिश्री कर ली जाती है। हालांकि इस पूरे मामले पर विभाग के लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

About Author