क्षयरोग: कभी जिंदगी से गयी थी हार, अब दूसरों के उपचार में बनी हैं मदगर

क्षयरोग: कभी जिंदगी से गयी थी हार, अब दूसरों के उपचार में बनी हैं मदगर
मरने की सोचने वाली अब बना रहीं दूसरों को स्वस्थ
जिन्हें लगता था चल नहीं पाऊंगी, जी रहीं सामान्य जिंदगी
क्षेत्र में डाट्स की दवाओं का सेवन कर बड़ी संख्या में क्षयरोगी हुए स्वस्थ
ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति ने इलाज में मदद के साथ दिया भावनात्मक सहयोग
जौनपुर, 16 अक्टूबर 2022
केस नं.1
डेंगुड़ा कुमार पट्टी बदलापुर की रेनू तिवारी (35) को हड्डी में दर्द रहता था। इतना दर्द कि उठ-बैठ नहीं पाती थीं। कमर में भी बहुत तकलीफ़ थी। वह कहती हैं कि तीन जगह इलाज कराया लेकिन आराम नहीं हुआ। लगता था, अब नहीं ठीक हो पाऊंगी। खुद से चल-फिर नहीं पाऊंगी, लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है ।
केस नं -2
बख्शा ब्लाक अंतर्गत गौराकला की कुसुमलता (40) को 2005 में पसलियों में दर्द और बुखार रहता था। भूख नहीं लगती थी और चल भी नहीं पातीं थीं। इस कारण दिमाग में नकारात्मक विचार आते थे। हमेशा यही तनाव रहता था कि मेरे नहीं रहने पर बच्चों का क्या होगा, कोई ग़लत कदम नहीं उठाया।
रेनू और कुसुम दोनों को क्षयरोग था और दोनों इस समय स्वस्थ और सामान्य जिंदगी जी रहीं हैं। कुसुम तो राजा बजार की प्रियंका, भतीजी गुड़िया, सलाहपुर प्रतापगढ़ की रेनू सिंह सहित पांच-छह लोगों का इलाज कराने में सहयोग कर उन्हें स्वस्थ बना चुकी हैं। इन सभी लोगों को स्वस्थ बनाने में डाट्स से मिलने वाली नि:शुल्क दवाओं तथा विभाग ने बहुत मदद की।
रेनू तिवारी तथा कुसुमलता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। परिवार भी उनकी शारीरिक परेशानी देखकर परेशान रहता था। इसके चलते रेनू के पति अनिल तिवारी ने उन्हें वाराणसी दिखाया जहां सीटी स्कैन हुआ और बोनटीबी का पता चला। वहां उनकी जांच और इलाज में काफी रुपए खर्च हो गए। इलाज में ज्यादा रुपए खर्च हो जाने पर रेनू के ससुर राममूर्ति तिवारी उन्हें लेकर ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति सिंगरामऊ आए। उन्होंने समिति की अध्यक्ष डा अंजू सिंह को सारी रिपोर्ट दिखाई। डॉ अंजू सिंह ने सिंगरामऊ में स्वास्थ्य विभाग से सम्पर्क कर डायरेक्ट्री आब्जर्व्ड थेरेपी शार्ट कोर्स (डॉट्स) की दवा शुरू कराई जो कि सालभर चलीं। इस दौरान उनका एक भी पैसा नहीं खर्च हुआ। डायरेक्ट बेनीफिशियरी ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से हर माह 500 रुपये उनके खाते में भी आए। डाट्स की नि: शुल्क दवा चलने तथा हर तरह का सहयोग मिलने से आज पूरी तरह स्वस्थ हैं। दूसरी तरफ कुसुम के चाचा हनुमान प्रसाद भी उन्हें लेकर समिति की अध्यक्ष डॉ अंजू सिंह के पास आए। उन्होंने सरकारी अस्पताल में जांच कराई जहां मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी होने का पता चला। जांच रिपोर्ट देख डॉ अंजू सिंह बोलीं, चिंता मत करो। अब तो शत-प्रतिशत ठीक हो जाओगी। कुसुम कहती हैं कि मेरी नौ महीने दवा चली। नौ महीने के दवा खाने के दौरान मेरा स्वास्थ्य बहुत अच्छा हो गया। तब से अब तक मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। इसके बाद मैंने अपनी तरह के बीमार पांच छह लोगों को समिति के सहयोग से स्वस्थ कराया।
जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश सिंह कहते हैं कि जनपद से क्षयरोग उन्मूलन में ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति ने बहुत योगदान दिया है। जनपद में उपचाराधीन 3,406 क्षयरोगियों की ऐसी ही 25 गैर सरकारी संस्थाएं (एनजीओ) दवा और पोषण में मददकर रहीं हैं। इस वर्ष जनपद में कुल 8,500 क्षयरोगियों की खोज का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसमें अब तक 3,400 क्षयरोगियों की खोज की जा चुकी है।
संस्था की अध्यक्ष अंजू सिंह बताती हैं कि 2004 से 2017 तक समिति डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर (डीएमसी) तथा ट्रीटमेंट एडहरेंस स्कीम के तहत ढाई से 3,000 के बीच क्षयरोगियों की जांच और उपचार में मदद कर चुकी है। वह सभी लोग स्वस्थ हो चुके हैं। 2018 से मार्च 2021 तक अक्षय प्रोग्राम के तहत 400 के लगभग क्षयरोगियों का इलाज कराया गया। निक्षय मित्र योजना के तहत समिति इस समय 160 क्षय उपचाराधीनों का पोषण तथा भावनात्मक सहयोग कर रही हैं।
मृत्यु दर में गिरावट: क्षयरोग उन्मूलन अभियान के जिला कार्यक्रम समन्वयक सलिल यादव कहते हैं कि विगत वर्षों में क्षयरोगियों की मृत्यु दर में गिरावट आई है। पहले मृत्यु दर पांच प्रतिशत थी जो अब घटकर चार प्रतिशत रह गई है। निक्षय पोषण योजना में क्षय उपचाराधीनों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रति माह 500 रुपये की धनराशि भेजे जाने की व्यवस्था है। इसके तहत 2021 में कुल 8,486 क्षय उपचाराधीनों को 1,74,55,00 रुपये तथा 2020 में 8,515 उपचाराधीनों को 2.10 करोड़ की धनराशि का वितरण किया गया। वर्ष 2022 में डीबीटी के माध्यम से जून तक कुल 113.5 लाख रुपये क्षय रोगियों को निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत भेजा जा चुका है।
