मेरे दैनिक जीवन में आयुर्वेद की उपयोगिता’ पर हुई भाषण प्रतियोगिता

‘मेरे दैनिक जीवन में आयुर्वेद की उपयोगिता’ पर हुई भाषण प्रतियोगिता
बच्चों ने हल्दी, लौंग, तुलसी को बताया रोग प्रतिरोधी शक्ति बढ़ाने वाली औषधि
रसोईं की चीजों, घर में मौजूद पौधों की खासियत बताकर रखी अपनी बात
जौनपुर, 11 अक्टूबर 2022
आयुर्वेद, आयुष और वेद दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका मतलब जीवन जीने का विज्ञान। यह विज्ञान ही हमारी रसोईं में मौजूद हल्दी, अजवायन, दूध जैसे खाद्य पदार्थों तथा हर दरवाजे पर दिखने वाली नीम, तुलसी, एलोवेरा जैसे पौधों के औषधीय गुणों की पहचान कराता है।
कलक्ट्रेट प्रेक्षागृह में मंगलवार को ‘मेरे दैनिक जीवन में आयुर्वेद की उपयोगिता’ विषय पर आयोजित जनपद स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में कुछ इस तरह की आयुर्वेद की खासियतें प्रतिभागियों ने बताईं। अंसी पटेल ने कहा कि घर में पाई जाने वाली हल्दी, लौंग, तुलसी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति बढ़ाती है। अर्चना यादव ने भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाने की सलाह दी और पानी खड़े होकर पीने से बचने को कहा। पूनम जायसवाल ने कहा कि आयुर्वेद अनेक अनुसंधानों का परिणाम है। आयुर्वेद समग्र रूप में एक जीवनशैली है। उन्होंने रोज व्यायाम कर शरीर को फुर्तीला बनाने, सौंदर्य के लिए रासायनिक प्रसाधनों की जगह चंदन, हल्दी, कुमकुम का प्रयोग उत्तम बताया। उन्होंने भरपूर नींद को याददाश्त मजबूती के लिए जरूरी बताया।
साक्षी यादव ने कहा कि आयुर्वेद का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। आयुर्वेद वात, कफ और पित्त का संतुलन बनाकर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है। वात हमारे आंतरिक और बाह्य गुणों को दर्शाता है। पित्त नियंत्रित कर पाचन, पोषण और चयापचय सही किया जाता है। कफ सही रहने से हड्डियां, मांसपेशियां और दांत मजबूत होते हैं। अंशिका मिश्रा ने अंग्रेजी में भाषण देकर बताया कि आयुर्वेदिक विधि से इलाज करने का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कार्यक्रम को जनपद के 50 स्कूलों के 120 प्रतिभागियों ने संबोधित किया।
प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ कमल रंजन ने प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के नियमों से अवगत करा दिया था। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रतिभागी के लिए तीन मिनट का समय निर्धारित है और वह अधिकतम चार मिनट में ही अपनी बात कह सकता है। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) बीबी सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ कमल रंजन तथा जिला होम्योपैथिक अधिकारी (डीएचओ) डॉ तुलसीदास शामिल थे। संचालन वरिष्ठ सहायक दीपक श्रीवास्तव, चिकित्साधिकारी डॉ विमल सेठ और डॉ प्रदीप सिंह ने किया। जनपद स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर चयनित होने वाले प्रतिभागियों की घोषणा तथा पुरस्कार वितरण एक सप्ताह के अंदर किया जाएगा।
