Jaunpur news रमजान में मिसवाक की बड़ी डिमांड

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इन्द्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट

रमजान में मिसवाक की बड़ी डिमांड

मिस्वाक का इस्लाम धर्म में विशेष महत्व

दुकानदारों के लिए बेहतर कमाई का तरीका

जौनपुर ।
इबादत के पवित्र महीना रमजान में मिसवाक और नीम के दातुन की डिमांड बढ़ गई है। शहर के हर छोटी बड़ी दुकानों पर मुस्लिम समाज के लोग मिसवाक को खरीदना नहीं भूलते।
डिमांड बढ़ने से छोटे दुकानदार भी अब अधिक संख्या में इसे दुकान के आगे सजा कर रखना शुरू कर दिए हैं।
शहर के नवाब यूसुफ रोड, अटाला मस्जिद रोड,
ओलन्दगंज, कसेरी बाजार, किला रोड
के साथ ही जिले के शाहगंज, खेतासराय, मड़ियाहूं, मुंगरा बादशाहपुर, गौराबादशाहपुर समेत अन्य ग्रामीण बाजारों में भी मिसवाक की बिक्री खूब बढ़ गई है।
शहर के कई हिस्सों में दुकानदारों ने अब मिस्वाक रखना शुरू कर दिया है।  छोटे दुकानदार भी इसे बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। और प्रतिदिन आठ से 10 डिब्बे डिब्बों की खपत हो रही है।  मिस्वाक का इस्लाम धर्म में विशेष महत्व है।
शहर के शेर मस्जिद के पेश इमाम मौलाना कारी जिया जौनपुरी ने बताया कि यह दांतों और मसूड़ों की सफाई के लिए लाभकारी होता है।
आमतौर पर मिस्वाक का उत्पादन भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब और अन्य मध्य पूर्वी देशों में होता है।
भागलपुर के बाजारों में रमजान के कारण इसकी मांग बढ़ गई है, जिससे दुकानदारों को भी अच्छा मुनाफा हो रहा है।
मिस्वाक का वृक्ष मुख्य रूप से अरब देशों में अधिक पाया जाता है, लेकिन भागलपुर में मिलने वाली मिस्वाक देश के विभन्नि राज्यों से आती है।
बाजार में एक पीस मिसवाक का दातुन इस समय 15 से 20 रुपए में बिक रहा है।
कई तरह के मिस्वाक होते है लेकिन इनमें मुख्य रूप से तीन ही बाजार में उपलब्ध है, इसलिए स्थानीय बाजारों में उपलब्ध मिस्वाक की कीमत अपेक्षाकृत कम होती है।  जिससे रोजेदारों को यह आसानी से मिल जाती है। वहीं अरब देशों से आयातित मिस्वाक की कीमत अधिक होती है। इसलिए ज्यादातर लोग देशी मिस्वाक को ही प्राथमिकता देते हैं।
खेतासराय  स्थित बॉम्बे जूस सेंटर के संचालक इम्तियाज वारसी, इश्तियाक अहमद ने बताया कि
रमजान के दौरान रोजेदार धार्मिक शुद्धता बनाए रखने के लिए मिस्वाक का इस्तेमाल अधिक करते हैं। जिससे इसकी बिक्री में खासा इजाफा देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वैसे ग्रामीण अंचल से नीम का दातुन भी आजकल लोग बचने के लिए दुकानों पर आ रहे हैं। मध्यम परिवार के लोग नीम के दातुन से ही काम चला लेते हैं।

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