February 2, 2026

Jaunpur news महराजगंज में सचिवों का साईकिल सत्याग्रह

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महराजगंज में सचिवों का साईकिल सत्याग्रह

आधुनिक जिम्मेदारियां और सुविधा साठ के दशक की

नए तरीके के आंदोलन से विभाग के अधिकारी भी पड़ गए हैरत

महराजगंज, जौनपुर।
प्रदेश ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन व ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के आह्वान पर विकास खण्ड महराजगंज के कर्मचारियों ने गुरुवार को अनोखे तरीके में अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठाया तो वहां मौजूद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी हैरत में पड़ गए।
कर्मचारी नेता संजय श्रीवास्तव व विनय यादव के नेतृत्व में सचिवों ने संदेश दिया कि जब सरकार हमें साइकिल भत्ता ही देती है, तो आइजीआरएस निस्तारण, आवास व कार्य सत्यापन, गौशाला निरीक्षण, पेंशन सत्यापन जैसे सभी कार्य साइकिल से ही किए जाएंगे।
जिम्मेदारियाँ हाईटेक, सफर अब भी साइकिल का ही है। जौनपुर ग्राम विकास अधिकारी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कर्मचारी नेताओं ने बताया कि ऑनलाइन हाजिरी, गैर-विभागीय कार्यों और बढ़ते फील्ड निरीक्षणों के दबाव के बीच सचिव आज भी गांव-गांव साइकिल से दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
एक ओर डिजिटल पोर्टल, समयबद्ध निस्तारण और 24 घण्टे की जवाबदेही है। दूसरी ओर वास्तविकता यह है कि सचिव की फाइलें, रजिस्टर और लैपटॉप/डोंगल सब कुछ उसी पुरानी साइकिल पर लदा हुआ चलता है। उन्होंने यह भी पीड़ा जताई कि एडीओ आईएसबी जैसे अधिकारियों को भी वाहन भत्ता नहीं मिलता, जबकि वे भी शिकायतों, निरीक्षणों और सत्यापनों के लिए लगातार फील्ड में रहते हैं, ऐसे में पूरी व्यवस्था ही जमीनी कर्मियों की तकलीफ से आंख चुराती दिखती है।
कर्मचारी ज्योति सिंह, संतोष दुबे, सुरेंद्र यादव, सत्येंद्र यादव, विकास गौतम, विकास यादव, शेष नारायण मौर्य, प्रशांत यादव, शशिकांत सोनकर, उमेंद्र यादव सहित सभी सचिवों की मौजूदगी ने इस सत्याग्रह को सामूहिक स्वर दिया।
प्रदर्शन के अंत में सचिवों ने साफ कहा कि यह चरणबद्ध सत्याग्रह केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे समय से अनदेखी हो रही न्यायपूर्ण मांगों की अंतिम चेतावनी है। यदि शासन ने अब भी सचिवों की स्थिति, वाहन/यात्रा भत्ता, ऑनलाइन हाजिरी और गैर-विभागीय कार्यों के बोझ पर गंभीर निर्णय नहीं लिया, तो अगले चरण में सभी सचिव अपना-अपना डोंगल ब्लॉक मुख्यालय पर जमा कर देंगे, जिससे ऑनलाइन कार्य व्यवस्था स्वतः ठप हो जाएगी। यह कदम उस गहरे आक्रोश का संकेत है, जिसमें सिस्टम को चलाने वाले ही सिस्टम से असहाय महसूस कर रहे हैं।
दरअसल ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन व ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के आह्वान पर सभी ग्राम सचिव विभागीय बैठक के लिए साइकिल से पहुंचे।
काली पट्टी बांधे सचिवों का यह जत्था सत्याग्रह आंदोलन के तीसरे चरण का प्रतीक ही नहीं, बल्कि उस विसंगति का मौन सवाल भी बन गया।
जिसमें डिजिटल युग की जिम्मेदारियाँ तो दे दी गईं पर साधन अब भी साइकिल भत्ते तक सीमित हैं।

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इस तरह कर्मियों ने बयां किया अपना दर्द
जौनपुर। पूरे दिन भर की भागदौड़, फाइलों का बोझ, डिजिटल पोर्टल की डेडलाइन और ऊपर से साइकिल की थकान के बावजूद ये सचिव अपने विभागीय दायित्वों से पीछे नहीं हटे, बस एक संदेश जरूर दे गए—गांव की सरकार चलाने वालों को भी इज्जत, सुविधाएँ और सम्मानजनक कार्य-परिस्थिति मिलनी चाहिए। विकास खंड महराजगंज में साइकिल पर निकला यह काफिला, ग्रामीण प्रशासन की उस सच्चाई का मार्मिक आइना बन गया, जिसे अक्सर रिपोर्टों और पोर्टलों के पीछे छिपा दिया जाता रहा है।

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