Jaunpur news भत्ते में बढ़ोतरी की मांग तेज 10 दिसंबर से ग्राम सचिव साइकिल पर करेंगे क्षेत्रीय दौरा
भत्ते में बढ़ोतरी की मांग तेज 10 दिसंबर से ग्राम सचिव साइकिल पर करेंगे क्षेत्रीय दौरा
जौनपुर ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के ग्राम सचिवों ने अपना आंदोलन तेज करते हुए 10 दिसंबर से अनोखे तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित करने का फैसला किया है। लंबे समय से लंबित वाहन भत्ते की बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर अब सभी सचिव मोटरसाइकिल-कार जैसे निजी साधनों का उपयोग छोड़कर केवल साइकिल से ही क्षेत्रीय भ्रमण करेंगे। यह कदम संगठन द्वारा चलाए जा रहे क्रमिक सांकेतिक सत्याग्रह आंदोलन के तीसरे चरण का हिस्सा है।
ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह तथा ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुबाष चंद्र पांडेय ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि देश तेजी से तकनीकी प्रगति की ओर बढ़ रहा है—बुलेट ट्रेन से लेकर मंगल मिशन तक—लेकिन ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम सचिव आज भी दशकों पुराने, अप्रासंगिक हो चुके साइकिल भत्ते के सहारे काम चलाने को मजबूर हैं। वर्तमान भत्ते की राशि न तो व्यावहारिक है और न ही आवश्यक कार्यों के अनुरूप।
संगठन का कहना है कि सरकार से कई बार पर्याप्त वाहन भत्ता बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। इसी के चलते सचिव अब सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए भत्ते की वास्तविक स्थिति दिखाने के लिए केवल साइकिल पर ही विभागीय कार्य करेंगे, चाहे दूरी कितनी भी हो।
ग्राम सचिवों के अनुसार, उन पर अव्यवहारिक ऑनलाइन उपस्थिति, बिना संसाधन दिए अन्य विभागों के अतिरिक्त कार्य, और कई प्रशासनिक दबाव बढ़ते जा रहे हैं। इन समस्याओं पर प्रभावी निर्णय लेने की मांग को लेकर आंदोलन का तीसरा चरण शुरू किया जा रहा है।
इससे पहले आंदोलन के प्रथम चरण में सचिवों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया था और दूसरे चरण में जिला एवं खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा था। साथ ही, सरकारी मोबाइल-सिम-डाटा भत्ता न मिलने से नाराज सचिवों ने अपने व्यक्तिगत मोबाइल नंबर वाले सभी सरकारी व्हाट्सएप समूहों से खुद को हटा लिया है।
दिलचस्प बात यह है कि विरोध के बीच भी सचिव अपने सभी जिम्मेदार विभागीय कार्यों के साथ-साथ विधानसभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष पुनरीक्षण में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण, क्रमिक और न्यायोचित मांगों पर आधारित है।

