Jaunpur news मेडिकल कॉलेज को मिला पहला शरीर
इन्द्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट
जौनपुर मेडिकल कॉलेज को मिला पहला शरीर
सेंगर दंपति ने जिले के लिए पूरा किया अपना वादा
जौनपुर। दो दशक पहले कानपुर से युग दधीचि देहदान अभियान प्रारंभ कर पूरे प्रदेश में इसका विस्तार करने वाले मनोज सेंगर व माधवी सेंगर ने सोमवार को जौनपुर मेडिकल कॉलेज को अध्ययन हेतु पहली देह कानपुर से लाकर समर्पित कर दिया।
अभी बीते 18 नवंबर को हुई प्रेसवार्ता में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से इस आशय का उन्होंने भरोसा दिया था जो आज पूर्ण कर दिया।
इस संबंध में उन्होंने सोमवार को मेडिकल कॉलेज में विस्तार से बताया कि कानपुर से देह लेकर आए सेंगर दंपति ने बताया कि जे ब्लॉक गोविंद नगर कानपुर निवासी 70 वर्षीय कारोबारी संतोष सिंह कुशवाहा ने अगस्त 2010 में देहदान संकल्प किया था।
बीती रात हृदयरोग संस्थान में उनका निधन होने पर उनके पुत्र आकाश सिंह ने मनोज सेंगर को रात दो बजे फोन पर सूचना देकर देहदान संकल्प पूरा कराने का आग्रह किया।
इस पर अभियान की महासचिव माधवी सेंगर ने देह को जौनपुर ले जाने का निश्चय किया। अभियान प्रमुख मनोज सेंगर सोमवार की सुबह कानपुर से चल कर शाम चार बजे जौनपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
जहां एनाटॉमी हेड डा भारती यादव, पूर्व प्राचार्या डॉ रुचिरा सेठी ने अपनी सहयोगियों डा अर्चना चौधरी, डॉ प्रियंका सिंह एवम छात्रों की उपस्थिति में पार्थिव देह को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सम्मान सहित स्वीकार किया।
इस अवसर पर मनोज सेंगर ने कहा कि कालेज के प्राचार्य डॉ आर बी कमल के अथक प्रयास के चलते यह देह चिकित्सा छात्रों को अध्ययन हेतु प्राप्त हुई है।
बाक्स
309वीं देह दान जौनपुर में आई
जौनपुर। कानपुर से चलते समय दिवंगत संतोष सिंह कुशवाहा की पत्नी कमलादेवी, पुत्र आकाश सिंह, पुत्रवधू निधि सिंह, एवं पुत्रियों गुंजन सिंह, रुचि सिंह सहित उपस्थित परिजनों द्वारा पार्थिव देह की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत देहदानी को अंतिम विदाई देते हुए वहां से जौनपुर के लिए रवाना किया।
जीवन भर एक सामाजिक व्यक्तित्व के रूप में देश की सेवा करने के बाद अपनी पार्थिव देह को भी समाज हित दान कर देने वाले स्व संतोष सिंह की समाज के हर वर्ग में चर्चा होती रही।
बाक्स
डेढ़ दशक पहले लिया था संकल्प
जौनपुर। मनोज सेंगर ने बताया कि 15 साल बाद यह संकल्प हुआ पूरा। स्व संतोष सिंह ने अगस्त 2010 में देहदान का संकल्प बहुत उत्साह पूर्वक किया था।
आज उनका संकल्प पूरा करने के साथ ही प्राचार्य डॉ आर बी कमल से किए वादे को पूरा करके शांति का अनुभव कर रहा हूं।
