Jaunpur news मंगेश एनकाउंटर केस में उप्र सरकार,तत्कालीन एसपी समेत पांच के खिलाफ दाखिल निगरानी स्वीकृत, नोटिस जारी
मंगेश एनकाउंटर केस में उप्र सरकार,तत्कालीन एसपी समेत पांच के खिलाफ दाखिल निगरानी स्वीकृत, नोटिस जारी
आरोप:शासन प्रशासन के दबाव में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी कर लोवर कोर्ट ने खारिज किया वाद
वादिनी के साक्ष्य की अनदेखी करने व पुलिस की झूठी रिपोर्ट पर विश्वास करने का आरोप
जौनपुर-हिमांशु श्रीवास्तव एडवोकेट
मंगेश यादव एनकांउटर केस में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दाखिल हत्या का वाद निरस्त करने के सीजेएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ मृतक की मां शीला देवी ने जिला जज की कोर्ट में निगरानी दाखिल किया। जिला सुशील कुमार शशि ने निगरानी स्वीकार कर विपक्षीगण को नोटिस जारी करते हुए 8 अप्रैल तिथि नियत किया है।
बता दें कि शीला देवी ने सीजेएम कोर्ट में वाद दाखिल किया था कि 2 सितंबर 2024 को 2:00 बजे चार पांच पुलिसकर्मी उसके घर आए। उसके बेटे मंगेश यादव को पूछताछ के लिए ले गए और डकैती कांड का आरोपी बताकर फर्जी मुठभेड़ में उसे मार दिया। कोर्ट ने एसडीएम विदुषी सिंह व एसटीएफ द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया कि मंगेश की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हुई मृतक की मां व बहन ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई जिससे हत्या की पुष्टि हो। कोर्ट ने वाद निरस्त कर दिया जिसके खिलाफ शीला देवी ने जिला जज की कोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य जरिए जिलाधिकारी, डीके शाही एसटीएफ प्रभारी व टीम सुल्तानपुर,तत्कालीन थानाध्यक्ष कोतवाली सुल्तानपुर, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर,थाना बक्सा की पुलिस के खिलाफ अधिवक्ता समर बहादुर यादव व ऋषि यादव के माध्यम से निगरानी दाखिल किया कि अधीनस्थ न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी करते हुए त्रुटि पूर्ण आदेश किया है। मात्र पुलिस वालों व एसडीएम की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रार्थना पत्र खारिज किया गया।वादिनी के प्रार्थना पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगेश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आज तक एसडीएम द्वारा नहीं दिया गया।वादिनी द्वारा जिन गवाहों का साक्ष्य बतौर हालफनामा व्यक्तिगत उपस्थिति होकर व जरिए डाक प्रस्तुत किया गया उस पर अधीनस्थ न्यायालय ने गौर नहीं किया। वादिनी के पुत्र की हत्या व एनकाउंटर जिस घटना में किया गया, उसका उस घटना में सम्मिलित होने का कोई साक्ष्य पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में नहीं दिया।जिस घटना में मंगेश को अभियुक्त बनाया गया। उस समय उसका लड़का घर पर था। उसकी मोबाइल का सीडीआर निकाल कर देखा जा सकता है। प्रतापगढ़,सुल्तानपुर में मंगेश के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं रहा। पुलिस अपने बचाव में झूठी कहानी बनाई।जिस पर कोर्ट ने विश्वास किया। मंगेश पर कभी गैंगस्टर नहीं लगा। शीला देवी ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश 23 फरवरी 2026 को निरस्त करने व पुन सुनवाई करके न्यायोचित आदेश पारित करने की कोर्ट से मांग किया।
