Jaunpur news टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ कलेक्ट्रेट में शिक्षकों का हुजूम, नारेबाजी के बीच सौंपा ज्ञापन
इंद्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ कलेक्ट्रेट में शिक्षकों का हुजूम, नारेबाजी के बीच सौंपा ज्ञापन
जौनपुर।
अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर शिक्षकों के हुजूम से गूंज उठा। सेवारत शिक्षकों को टीईटी (TET) अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग को लेकर भारी संख्या में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक जिलाध्यक्ष व प्रांतीय संयुक्त मंत्री अमित सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अमित सिंह ने कहा कि “बीस–पच्चीस वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक दो वर्ष में टीईटी पास करने की शर्त थोपना पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भर्ती हुई, तब सभी शिक्षकों ने आवश्यक अर्हता पूरी कर प्रतियोगिता परीक्षा पास कर ही नियुक्ति प्राप्त की थी। अब पुनः टीईटी की अनिवार्यता थोपना संवेदनहीन निर्णय है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और एनसीटीई द्वारा 2017 में आरटीई एक्ट में किया गया संशोधन शिक्षकों से छुपाकर लागू किया गया, जबकि उसी के आधार पर सेवारत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपी जा रही है। यह छल है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर के निर्णय में हस्तक्षेप कर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करें।
सभा के बाद शिक्षकों ने “काला कानून वापस लो, शिक्षक शोषण बंद करो, टीईटी अनिवार्यता समाप्त करो” जैसे नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा।
कार्यक्रम को माध्यमिक शिक्षक संघ, अटेवा, टीएसटीसी समेत कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। संचालन जिला मंत्री सतीश पाठक ने किया। इस अवसर पर जिलेभर से आए सैकड़ों शिक्षक— जिनमें महिला शिक्षिकाओं की भी बड़ी संख्या शामिल रही— ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए आंदोलन को मजबूती दी।

