February 24, 2026

बच्चों को डायरिया से बचाने में आशा कार्यकर्ता निभा रहीं अहम भूमिका 

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सघन दस्त नियंत्रण अभियान

ग्रामीण क्षेत्र के 2,57,457 तथा शहरी क्षेत्र के 2,876 बच्चों को दिया ओआरएस, 14 दिन के लिए  जिंक भी प्रदान किया 

जौनपुर, 29  जुलाई 2022

सघन दस्त नियंत्रण अभियान के दौरान सोंधी ब्लाक के मानीखुर्द में आशा कार्यकर्ता सुनीता देवी घर-घर जाकर दस्त की पहचान और उससे बचाव की जानकारी दे रहीं थीं। इस दौरान सुनील के घर उनकी तीन साल की बेटी स्नेहा दस्त से प्रभावित मिली। ऐसे ही सोंधी ब्लॉक के असरफपुर उसरहटा गांव में आशा कार्यकर्ता कृष्णा देवी ने अरविंद कुमार और प्रियादेवी के बेटे वंश (दो वर्ष) के दस्त से प्रभावित होने की पहचान की। 

 ऐसे हुई पहचान: आशा कार्यकर्ता सुनीता ने स्नेहा के परिजनों को तथा कृष्णा ने वंश के परिजनों को बताया कि यदि बच्चे को पानी जैसी पतली दस्त  दिन में तीन-चार बार हो, तो यह डायरिया हो सकता  है। इससे बच्चे का शरीर सुस्त हो जाता है। आंखें धंसने लगती हैं। त्वचा  सिकुड़ने लगती  है। वह कुछ खा-पी नहीं पाता। शरीर में पानी की कमी होने लगती है। यह स्थिति खतरनाक है।

दस्त होने पर क्या करें: ऐसी स्थिति में बच्चे को ओआरएस का घोल बनाकर पिलाने तथा जिंक की गोली खिलाने की सलाह दी। उन्हें ओआरएस घोल बनाना सिखाया तथा जिंक की 14 गोली देकर 14 दिन तक नियमित उसका सेवन करने को कहा। आशा की सलाह मानकर स्नेहा की मां ने उसे ओआरएस का घोल पिलाया और जिंक की गोली खिलाई। इससे उसके दस्त में सुधार हुआ। आशा ने अगले दो दिन फॉलोअप किया  तो स्नेहा स्वस्थ हो चुकी थी। वंश को भी ओआरएस का घोल तथा जिंक पिलाया गया। तीसरे दिन के फॉलोअप तक वह स्वस्थ हो चुका था। आशा ने बताया कि इस पर भी यदि आराम न हो तो 102 या 108 नम्बर एम्बुलेंस से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

सोंधी के ब्लाक मोबलाइजेशन को-आर्डिनेटर (बीएमसी) अवधेश कुमार तिवारी ने बताया कि अभियान के दौरान 96 बच्चे दस्त से प्रभावित चिह्नित किए गए और उनका संबंधित आशा कार्यकर्ताओं ने ओआरएस घोल तथा जिंक के माध्यम से उपचार कराया। सभी स्वस्थ हैं। 12 डायरिया से गंभीर रूप से प्रभावित बच्चे विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों में लाए गए, जहां उनका उपचार हुआ और वह ठीक हैं। उन्होंने बच्चों के दस्त से प्रभावित होने पर साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी है। हाथ की साफ-सफाई करके ही ओआरएस का घोल बनाने को कहा।

  मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. लक्ष्मी सिंह बतातीं हैं कि जून महीने में बच्चे दस्त से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसका प्रमुख कारण अधिक गर्मी, धूप, धूल, दूषित पीने का पानी और गंदगी है। इसलिए जून माह में इंटेंसिव डायरिया कंट्रोल फोर्टनाइट (आईडीसीएफ) अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 1790 बच्चे डायरिया प्रभावित चिह्नित किए गए। उन्हें ओआरएस के पैकेट तथा 14 दिन के लिए जिंक उपलब्ध कराया गया। 13 बच्चों में डायरिया के गंभीर लक्षण दिखे  जिन्हें आशा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों में रेफर कराया।    आईडीसीएफ अभियान के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ एससी वर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान डायरिया से बचाव के लिए जनपद में 506 जगहों पर ओआरएस-जिंक कार्नर बनाया गया। 2,635 स्कूलों में हैंडवॉश का प्रदर्शन किया गया। डायरिया नियंत्रण के लिए जनपद में 35 मोबाइल टीमें गठित की गईं थीं। इन टीमों ने 960 बच्चों को ओआरएस तथा 14 दिन के लिए जिंक उपलब्ध कराया। अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के 2,57,457 तथा शहरी क्षेत्र के 2,876 बच्चों सहित कुल 2,60,333 बच्चों को ओआरएस तथा 14 दिन के लिए जिंक प्रदान किया गया । अभियान के लिए 3,627 आशा कार्यकर्ताओं, 364 एएनएम, 76 मेडिकल आफिसर, 87 स्टाफ नर्स और 185 कम्युनिटी हेल्थ आफिसर (सीएचओ) को ट्रेनिंग दी गई थी| 

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