जल, जंगल, जमीन के संरक्षण में क्रांतिसूर्य बिरसा मुंडा का योगदान: जनजातियों की ऐतिहासिकता को उल्लेखित करता वर्तमान संदर्भ।
जलालपुर(जौनपुर), आजादी के 75 वे अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रंखला में आज दिनांक 9 जून 2022 को भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के उपलक्ष में महाविद्यालय में ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर आनंद शंकर चौधरी, संचालिका डॉक्टर अल्केशवरी सिंह, कोऑर्डिनेटर डॉ. आशुतोष पांडे, को-कोऑर्डिनेटर डॉ प्रवीण श्रीवास्तव, एसोसिएट कोऑर्डिनेटर श्री जगत नारायण सिंह, टेक्निकल मैनेजर श्री अनिल कुमार, इन-हाउस स्पीकर डॉक्टर संजय नारायण सिंह, मुख्य वक्ता श्री हरिशंकर कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता), श्री मुकेश कुमार की भूमिका में रहे।
डॉ प्रतिभा सिंह, डॉ राकेश गुप्ता, श्री सफीउल्लाह अंसारी, श्री सोमारूराम प्रजापति के साथ-साथ लगभग 200 प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। श्री हरि शंकर कुमार ने मध्य भारत के 6 राज्यों में निवास करने वाली विभिन्न जनजातियों और उनकी समस्याओं साथ ही साथ जनजातीय पहचान उनके पूर्वजों और बिरसा मुंडा के योगदान के साथ-साथ वर्तमान में एक नई राजनीतिक चेतना जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। श्री मुकेश कुमार ने बिरसा मुंडा के विचारों की वर्तमान समाज में प्रासंगिकता पर चर्चा की। महाविद्यालय के प्राचार्य ने जनजातीय समाज और सब समाज के बीच अंतर संबंध को दर्शाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया। उनकी औपनिवेशिक कालीन समस्याओं और वर्तमान समस्याओं साथ ही साथ जनजातीय संस्कृति को आधुनिक समाज में प्रचलित फैशन के साथ को-रिलेट किया।
इस पर चर्चा में सुझाव के तौर पर यह निष्कर्ष आया कि एक शोधार्थी या टूरिस्ट के तौर पर सर्वप्रथम शोधार्थी या आगुन्तकजनो को जनजातीय क्षेत्रों का भ्रमण और अवलोकन करने के लिए उनकी संस्कृति, रीति रिवाज, आदर सत्कार की शैली, व्यवहारिक भाषा, दिनचर्या विधि विधान, प्राकृतिक पूजा एवं विश्वास आदि की जानकारी के साथ साथ 15 से 50 दिन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। अंत में श्री जगत नारायण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन कर इस कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की।
