Jaunpur news गैंगरेप केस: 6 साल बाद कानून का ‘महाबज्र’, दो दोषियों को 20-20 साल की सख्त कैद!

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जौनपुर गैंगरेप केस: 6 साल बाद कानून का ‘महाबज्र’, दो दोषियों को 20-20 साल की सख्त कैद!
​”न्याय में देरी हो सकती है, अंधेर नहीं।” जौनपुर के खेतासराय की एक साहसी बेटी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। साल 2019 में घर की चारदीवारी के भीतर दरिंदगी करने वाले दो अपराधियों को अदालत ने सलाखों के पीछे भेजकर समाज को एक कड़ा संदेश दिया है।
​ वारदात: जब दिन के उजाले में तार-तार हुई थी सुरक्षा
​यह खौफनाक दास्तान 27 दिसंबर 2019 की है। दोपहर के करीब 12:30 बजे जब पूरा इलाका अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मसरूफ था, तब खेतासराय की एक 24 वर्षीय युवती अपने घर में अकेली थी। पीड़िता, जो इंटरमीडिएट तक शिक्षित है, को भनक भी नहीं थी कि उसकी सुरक्षा पर ग्रहण लगने वाला है।
​तभी घात लगाकर बैठे दिलीप उर्फ नखड़ू यादव और हनुमान उर्फ चंद्रकेश यादव अचानक घर की सीमा लांघकर भीतर दाखिल हो गए। आरोपियों ने युवती की बेबसी का फायदा उठाकर उसे दबोच लिया। वे उसे जबरन कमरे में खींच ले गए और बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। गुनाह को अंजाम देने के बाद, दोनों ने पीड़िता को जुबान खोलने पर जान से मारने की खौफनाक धमकी दी और फरार हो गए।
​⚖️ अदालत का फैसला: मिट गया गुनाह का गुरूर
​धमकियों के आगे घुटने टेकने के बजाय पीड़िता ने कानून पर भरोसा जताया और खेतासराय थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस की विवेचना, पुख्ता मेडिकल साक्ष्य और मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पीड़िता के बयानों ने आरोपियों के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
​दोनों पक्षों की मैराथन दलीलों और सबूतों को परखने के बाद, अपर सत्र न्यायाधीश बी. नारायणन की अदालत ने दोनों आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी पाया और निम्नलिखित सजा मुकर्रर की:
​कठोर कारावास: दोनों दोषियों को 20-20 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे।
​आर्थिक दंड: कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
​डिफॉल्ट सजा: यदि दोषी इस जुर्माने की रकम को अदा करने में नाकाम रहते हैं, तो उन्हें 2 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
​इस फैसले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे खुद को कानून से कितना भी बड़ा क्यों न समझ लें, आखिरकार न्याय की चौखट पर उनके पाप का अंत होना निश्चित है। जौनपुर की इस बेटी का संघर्ष उन तमाम पीड़ितों के लिए एक मिसाल है जो इंसाफ की आस में अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।

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