Jaunpur news जिंदगी और मौत के बीच झूल रही 22 साल के अवधेश की सांसें, बुजुर्ग पिता की फटी आंखें ढूंढ रही हैं मददगार

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जिंदगी और मौत के बीच झूल रही 22 साल के अवधेश की सांसें, बुजुर्ग पिता की फटी आंखें ढूंढ रही हैं मददगार
​जौनपुर। एक हंसता-खेलता परिवार, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने और महज 22 साल की उम्र… लेकिन किस्मत के एक क्रूर झटके ने सब कुछ बदल कर रख दिया। शहर के जोगियापुर मोहल्ले का रहने वाला 22 वर्षीय अवधेश निषाद (पुत्र विनोद निषाद) आज अस्पताल के आईसीयू (ICU) में अपनी जिंदगी की आखिरी जंग लड़ रहा है।

​काल बनकर आई वह काली रात
​बीती 25 मई की रात अवधेश के परिवार के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। जफराबाद स्थित हरगोविंद स्कूल के पास मोटरसाइकिल से लौटते वक्त एक भीषण सड़क दुर्घटना का वह शिकार हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि अवधेश के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वह वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे नईगंज स्थित शेखर कांति हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां वह इस वक्त वेंटिलेटर और डॉक्टरों की निगरानी में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा है।
​आर्थिक तंगी ने तोड़ी रीढ़, जनप्रतिनिधियों से आस
​एक तरफ बेटा जिंदगी के लिए तड़प रहा है, तो दूसरी तरफ आर्थिक तंगी का पहाड़ इस गरीब परिवार पर टूट पड़ा है। इलाज का खर्च इतना भारी है कि मजदूर पिता की हैसियत से बाहर हो चुका है। अपनों को खोने का डर और जेब की लाचारी ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया है।

​रोते-बिलखते परिजनों ने रूंधे गले से जनपद के सभी माननीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों से हाथ जोड़कर आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।

​”साहब! हमारा बच्चा अस्पताल में दम तोड़ रहा है। हमारे पास दवा और इलाज के पैसे नहीं बचे हैं। अगर जौनपुर के जनप्रतिनिधि और जनता हमारे साथ खड़ी नहीं हुई, तो हम अपने कलेजे के टुकड़े को खो देंगे।”
— पीड़ित परिवार

​एक अपील: आपकी एक छोटी सी मदद बचा सकती है एक चिराग
​यह समय राजनीति या उदासीनता का नहीं, बल्कि इंसानियत दिखाने का है। जौनपुर के नेताओं और सक्षम नागरिकों से अपील है कि वे आगे आएं और इस असहाय निषाद परिवार का संबल बनें। आपके द्वारा की गई एक छोटी सी आर्थिक मदद, 22 साल के युवा अवधेश को दोबारा नई जिंदगी दे सकती है।