Jaunpur news तिलकधारी पीजी कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन, वैज्ञानिकों ने सतत संसाधन प्रबंधन पर रखे शोध विचार

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तिलकधारी पीजी कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन, वैज्ञानिकों ने सतत संसाधन प्रबंधन पर रखे शोध विचार
जौनपुर। तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी “अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक : स्थाई संसाधन प्रबंधन से वैश्विक समाधान” के दूसरे दिन देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध और विचार साझा किए। संगोष्ठी के दौरान पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और आधुनिक तकनीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में बीएआरसी मुंबई के डॉ. एस. डी. कौशिक, जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के डॉ. अनवर अली, डीएमआईएचईआर वर्धा के डॉ. पवन कुमार, आईआईटी रोपड़ के विश्वपाल, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के प्रो. संतोष कुमार, साउथ अफ्रीका की ईवा वूमेन्स यूनिवर्सिटी के डॉ. अखिलेश कुमार तथा अमेरिका के डॉ. रविंद्र सिंह ने रासायनिक विषविज्ञान और एडवांस मास स्पेक्ट्रोस्कॉपी तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक अनुसंधान में इन तकनीकों का उपयोग नियामक और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद की डॉ. रश्मि सिंह ने जूनोटिक रोगों की पहचान और निगरानी में आधुनिक आणविक तकनीकों की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं एसआरएम विश्वविद्यालय सोनीपत के प्रो. सैमुअल राज ने दवाओं के दुष्प्रभावों को कम करते हुए उनकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपायों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान के डॉ. जयेंद्र नाथ शुक्ल ने फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीट स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपर्डा की पहचान में जैव-सूचना विज्ञान की भूमिका बताई, जबकि आईसीएमआर के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के प्रो. प्रदीप बी. पाटील ने वायरस अनुसंधान में पशु मॉडलों की उपयोगिता पर चर्चा की। डॉ. स्नेहा मिश्रा ने विषविज्ञान के अध्ययन में ड्रोसोफिला मॉडल के महत्व को रेखांकित किया।
रायपुर की डॉ. पल्लवी सिन्हा ने बायोवेस्ट के सतत उपयोग और बायोहाइड्रोजन उत्पादन के लिए स्मार्ट फर्मेंटेशन तकनीक पर जानकारी दी। वहीं बस्तर के डॉ. अतुल त्रिवेदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के बीच डिजिटल व मोबाइल बैंकिंग के विस्तार पर चर्चा की।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डॉ. राम चंद्र मौर्य ने दीर्घकालिक तनाव के प्रभाव से नवजात चूजों के मस्तिष्क में होने वाले न्यूरोनल परिवर्तनों पर अपना शोध प्रस्तुत किया। कृषि सत्र में प्रो. संतोष कुमार ने मक्के की बीमारियों के जैविक नियंत्रण, एसडीजे कॉलेज आजमगढ़ के प्रो. शैलेंद्र विक्रम सिंह ने स्ट्रॉबेरी उत्पादन की उन्नत तकनीक तथा डॉ. मुकुल दत्त पांडेय ने ‘श्री अन्न’ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इसके अलावा एसएमएमटीडी कॉलेज बलिया के प्रो. बृजेश सिंह ने भारतीय कृषि की वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा की, जबकि बीएयू भागलपुर के डॉ. महेश कुमार सिंह ने जल संरक्षण विषय पर ऑनलाइन प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कई शोधार्थियों और शिक्षकों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम आसरे सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार सिंह, प्रो. राहुल सिंह, प्रो. रमेश सिंह, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. विजयलक्ष्मी सिंह, डॉ. मानसिंह, डॉ. प्रेमचंद, डॉ. अजय कुमार, डॉ. देवव्रत मिश्र, डॉ. शैलेंद्र सिंह वत्स और डॉ. आशुतोष मिश्रा सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशा रानी ने किया, जबकि संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एस. के. वर्मा ने अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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