Jaunpur news बाइक रैली व जन सभा आयोजित कर काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति ने मनाया नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती
बाइक रैली व जन सभा आयोजित कर काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति ने मनाया नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती
Jaunpur तेजीबाजार, जौनपुर, उ.प्र।
आजादी आन्दोलन के गैर समझौतावादी धारा के महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति जौनपुर की ओर से आज 23 जनवरी 2026 को बाईक जुलूस व जन सभा का आयोजन किया गया। बाईक जुलूस की शुरुआत सिंगरामऊ से की गई, जो कुशहां, बटाऊबीर, बदलापुर, कलिंजरा होते हुए तेजीबाजार तक गया। दूसरा बाइक जुलूस सराय पड़री से शुरु करके गद्दोपुर, महराजगंज, लोहिंदा होते हुए तेजीबाजार तक गया। दोनों बाइक जूलूसों के पहुंचने के बाद तेजीबाजार मेंनेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष जन सभा हुई। जिसमें काफी संख्या में छात्र नौजवानों ने भाग लिया। जन सभा शुरु होने के पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा पर सैकड़ों लोगों ने माल्यार्पण किए। इस अवसर पर राष्ट्रवादी नौजवान सभा के पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी मौजूद रहे।
जन सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी आंदोलन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन कठिन संघर्षों से भरा रहा। वे बचपन में अपने घर के पास रास्ते में रोजाना एक बूढ़ी मां को भीख मांगते देखकर द्रवित जाते और अपने स्कूल का टिफिन प्रतिदिन दे देते और सोचा करते कि कब हमारे समाज से इस तरह की गैर बराबरी खत्म होगी। दूसरी घटना, जो उन्हें प्रभावित किया, वह थी महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस की सबसे कम उम्र में फांसी। इसके अलावा आस-पास हो रहे अन्याय-अत्याचार देखकर उनके मन में अंग्रेजों के प्रति नफरत पैदा हो गई। उन्होंने कहा था- “झूठ और अन्याय के साथ समझौता करना जघन्यतम अपराध है।” इस तरह राजनैतिक संघर्ष में जब वे 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये, तो उन्होंने आह्वान किया कि “हमारा पहला लक्ष्य है पूर्ण स्वराज्य हासिल करना और उसके बाद भारत में समाजवाद कायम करना।” इसीलिए उन्होंने कहा था- “मैं अपने बचपन में अंग्रेजों को देश से खदेड़ देना ही सबसे बड़ा कर्त्तव्य समझता था। लेकिन बाद में सोचकर देखा कि अंग्रेजों को खदेड़ देने मात्र से ही हमारे कर्त्तव्य समाप्त नहीं हो जायेंगे। भारत में नयी समाज व्यवस्था लागू करने के लिए एक और क्रांति की जरूरत होगी।”
लेकिन आजादी के 78 वर्षों के बाद भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस सहित हमारे देश के तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों का सपना पूरा नहीं हुआ। आज भी बूढ़ी मां स्वरूप महिलाएं बेसहारा बनकर भीख मांगने पर मजबूर हैं। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। महंगाई चरम पर है। शिक्षा व रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। समाज में नैतिक पतन व गुण्डागर्दी व्याप्त है। साम्प्रदायिकता व धार्मिक उन्माद बढ़ रहा है। लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इस तरह शोषण व अन्याय पर आधारित व्यवस्था कायम है और चंद पूंजीपति देश के मालिक बन बैठे हैं। परिणामस्वरुप आम जनता त्राहि त्राहि कर रही है। इसलिए आज समय की मांग है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन संघर्षों से सीख लेकर उनके क्रांतिकारी विचारों के आधार पर लोगों को संगठित करें और जन समस्याओं के खिलाफ संघर्ष तेज करें।
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद कुमार शुक्ल ने किया। कार्यक्रम को कृष्णा सिंह, नवीन सिंह, दिलीप कुमार खरवार, देवव्रत निषाद, प्रमेन्द्र सिंह (पम्मू), कुंवर आजाद सिंह ने सम्बोधित किए। अंजली सरोज, जिमी गुप्ता ने क्रांतिकारी व देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर इन्दुकुमार शुक्ल, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, अपूर्व कुमार दुबे, संतोष कुमार प्रजापति, मीता गुप्ता, पूनम प्रजापति, दिवाकर सिंह, जटाशंकर सिंह, नवीन गुप्ता, नवीन सिंह, शिवभवन सिंह, राजबहादुर विश्वकर्मा, राकेश निषाद, विनोद मौर्य, प्रवीण सिंह, विजयप्रकाश गुप्त, इदरीश, रहमान, देवव्रत निषाद, संजय सिंह, शमीम अहमद, नन्हकूराम, कुमकुम गुप्ता, पायल, दीक्षा खरवार, श्वेता विश्वकर्मा, एकता, सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
