Jaunpur news शादी है,शव आया तो अपशगुन होगा,मां की लाश को चार दिन डीप फ्रीज़र में रख दो, जौनपुर के वृद्ध आश्रम में महिला की मौत के बाद बेटों का अमानवीय रवैया, गोरखपुर में दफनाया शव
शादी है,शव आया तो अपशगुन होगा,मां की लाश को चार दिन डीप फ्रीज़र में रख दो, जौनपुर के वृद्ध आश्रम में महिला की मौत के बाद बेटों का अमानवीय रवैया, गोरखपुर में दफनाया शव
यूपी के जौनपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है एक वृद्ध आश्रम में रह रही गोरखपुर की शोभा देवी (65) की बीमारी के चलते मौत हो गई। लेकिन मौत के बाद उनके बेटों का अमानवीय व्यवहार सभी को झकझोर देने वाला रहा। वृद्ध आश्रम के प्रबंधकों ने जब परिजनों को सूचना दी तो बड़े बेटे ने कहा—“घर में शादी है, मां की लाश अभी भेजोगे तो अपशगुन होगा… चार दिन डीप फ्रीज़र में रख दो, शादी के बाद ले जाऊँगा।
परिजनों के इस संवेदनहीन जवाब के बाद आश्रम कर्मियों और कुछ रिश्तेदारों के प्रयास से किसी तरह शव को गोरखपुर भेजा गया। लेकिन वहां बड़े बेटे ने अंतिम संस्कार करने के बजाय मां के शव को दफना दिया। पिता भुआल गुप्ता का कहना है कि उन्हें बताया गया कि चार दिन बाद मिट्टी से शव निकालकर अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिस पर वे बेहद व्यथित हैं। उनकी पीड़ा थी—“चार दिन में शव कीड़े खा जाएंगे, फिर क्या संस्कार होगा
परिवार से निकाले जाने के बाद भटकते हुए पहुंचे जौनपुर
गोरखपुर के केपियरगंज क्षेत्र के भरोइया गांव निवासी भुआल गुप्ता किराना व्यवसाय करते थे। पत्नी शोभा देवी और तीन बेटों के साथ जीवन बीत रहा था। लेकिन करीब एक साल पहले पारिवारिक विवाद के चलते बड़े बेटे ने माता-पिता को घर से निकाल दिया। दुखी भुआल सुसाइड करने राजघाट गए थे, जहां लोगों ने उन्हें समझाकर अयोध्या जाने की सलाह दी। अयोध्या में सहारा न मिलने पर वे मथुरा पहुँचे, जहाँ के लोगों ने जौनपुर के एक वृद्ध आश्रम का पता दिया। आश्रम संचालक रवि कुमार चौबे ने दोनों को अपने संरक्षण में ले लिया।
कुछ महीने पहले शोभा देवी के पैर में समस्या हुई थी और उनका उपचार चल रहा था। 19 नवंबर को अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
बेटों का व्यवहार चौकाने वाला
मौत की सूचना छोटे बेटे को दी गई, जिसके बाद बड़े बेटे का संदेश आया कि“शादी है, शव घर आया तो अपशगुन होगा, चार दिन बाद अंतिम संस्कार करेंगे।” वृद्ध आश्रम प्रबंधक रवि चौबे ने भी बेटों से बात की, लेकिन उन्होंने वही जवाब दोहराया।
रिश्तेदारों की इच्छा पर शव गोरखपुर भेजा गया, पर वहां भी बड़े बेटे ने संस्कार के बजाय दफनाने का निर्णय लिया। भुआल गुप्ता इस व्यवहार से बेहद दुखी हैं और कहते हैं कि बेटे कभी माँ-बाप से मिलने आश्रम तक नहीं आए।
यह घटना न सिर्फ संवेदनहीनता का उदाहरण है, बल्कि वृद्ध माता-पिता के प्रति बढ़ती उपेक्षा का मार्मिक चित्र भी प्रस्तुत करती है।
