January 25, 2026

Jaunpur news 14 साल की उम्र में शुरू की नौकरी, अब 5 करोड़ की मशरूम कंपनी का मालिक

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जौनपुर का बेटा बना मिसाल: 14 साल की उम्र में शुरू की नौकरी, अब 5 करोड़ की मशरूम कंपनी का मालिक

Jaunpur news मेहनत, लगन और सोच में नवीनता हो तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। इस कहावत को साकार कर दिखाया है जौनपुर जिले के केराकत तहसील स्थित मेहोड़ा गांव निवासी आनंद राय ने। कभी 250 रुपये महीना कमाने वाले आनंद आज करोड़ों की कंपनी के मालिक हैं और गांव में ही 100 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

शुरुआत थी बेहद साधारण

आनंद राय ने मात्र 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और नौकरी की तलाश में घर छोड़ दिया। छोटी उम्र में ही उन्होंने डिलीवरी बॉय का काम शुरू किया, जहां उन्हें 250 रुपये मासिक वेतन मिलता था। जीवनयापन के लिए संघर्ष करते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को जिंदा रखा।

मशरूम की खेती बनी किस्मत की चाबी

लगभग एक साल पहले आनंद राय ने अपने गांव में कई एकड़ में मशरूम उत्पादन के लिए एक आधुनिक प्लांट की स्थापना की। यह प्लांट आज 5 से 6 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर दे रहा है। आनंद ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि अपने गांव के 100 से अधिक बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार देकर गांव के विकास में भागीदारी निभाई है।

विदेशों तक पहुंचा जौनपुर का मशरूम

आज आनंद राय द्वारा उगाया ऑर्गेनिक मशरूम केवल देश में ही नहीं, बल्कि सिंगापुर, यूक्रेन और स्पेन जैसे देशों में भी निर्यात किया जा रहा है। इसने जौनपुर की मिट्टी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाई है। आनंद के मशरूम की खासियत यह है कि यह कंपोजिट खाद से तैयार किया गया है, जो पूरी तरह से सेहत के अनुकूल और स्वाद में बेहतर है।

भविष्य की बड़ी योजनाएं

सी भारत से ख़ास बातचीत करते हुए आनंद राय ने बताया कि उनका उद्देश्य न केवल मशरूम उत्पादन करना है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने कहा, “फिलहाल 100 लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन आने वाले 3 से 4 वर्षों में हम इसे बढ़ाकर 700 तक ले जाएंगे। अब हमारे गांव के लोगों को रोजगार के लिए मुंबई या दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।”

गांव में लौट रही खुशहाली

आनंद राय की यह पहल गांव में एक नई उम्मीद की किरण बन गई है। गांव के लोग उनके काम की सराहना कर रहे हैं और युवाओं को यह प्रेरणा मिल रही है कि गांव में रहकर भी कुछ बड़ा किया जा सकता है। उनकी यह कहानी न सिर्फ युवाओं के लिए मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना गांवों से ही शुरू होती है।

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