Jaunpur news टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर उठाई मांग
इन्द्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर उठाई मांग
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग के आह्वान पर हुआ जोरदार प्रदर्शन
जिला प्रशासन के माध्यम से पीएम, शिक्षा मंत्री को सौपा 11 सूत्री का मांग पत्र
जौनपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आवाहन पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग के बैनर तले सैकड़ो शिक्षकों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई सभा में शिक्षक नेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार आवाज बुलंद किया।
कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित विशाल धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के जिला संयोजक व मंडल अध्यक्ष शिक्षक नेता सत्येंद्र सिंह ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया था। इससे पूर्व देशभर में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों, योग्यता मानकों एवं चयन प्रक्रियाओं के अनुरूप विधिवत रूप से की जा चुकी थीं। ऐसे शिक्षकों ने वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिकाओं में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में अपने सेवा अधिकारों, पदोन्नति एवं भविष्य को लेकर चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। संगठन का मानना है कि किसी भी नए पात्रता मानदंड को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू करना न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि न्यायालय के निर्णय का सम्मान सभी का संवैधानिक दायित्व है, किंतु जनहित में आवश्यक नीतिगत एवं विधायी समाधान उपलब्ध कराने का अधिकार संसद एवं सरकार के पास निहित है। इसलिए केंद्र सरकार एवं संसद को इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए प्रभावित शिक्षकों को संरक्षण प्रदान करना चाहिए।
महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत दी जाए तथा सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण किया जाए।
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इन्हें भेजा गया अपना मांग पत्र
जौनपुर। जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे गए मांग पत्र में आंदोलन के जिला संयोजक व मंडल अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में 11 सूत्री ज्ञापन सौपा गया।
जिसमें बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों व उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को
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धरना प्रदर्शन में यह रहे मौजूद
जौनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित विशाल धरना प्रदर्शन के दौरान जिला सह संयोजक केशव सिंह , अभिषेक सिंह, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय , रत्नेश सिंह अरविंद प्रकाश अध्यक्ष शाहगंज, अखिलेश मिश्रा महामंत्री , राकेश सिंह अध्यक्ष खुटहन , अभिषेक उपाध्याय महामंत्री, संदीप सिंह , टिल्लू सिंह, प्रीति श्रीवास्तव, प्रीति मौर्या, बबीता सिंह, नीतू सिंह, मधुलिका अस्थाना, शिवम सिंह ,राकेश सिंह, कंचन यादव, प्रमोद कुमार ,सोमनाथ सिंह, डॉ सतीश सिंह, अनिरुद्ध कुमार, दिवाकर ,जयप्रकाश यादव ,अमरेंद्र गुप्ता ,रवि भूषण मिश्रा ,धर्मेंद्र सिंह, वीरेंद्र कुमार, आशीष सिंह ,अखिलेश कुमार, सुधाकर सिंह, विनय मिश्रा, शैलेंद्र पाल , जनार्दन सिंह, राजेश सिंह, संजय सिंह, विकास सिंह, पंकज सिंह अन्य उपस्थित रहे।

