Jaunpur news छोटे किसान से प्रगतिशील कृषक बनने तक की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

Share

छोटे किसान से प्रगतिशील कृषक बनने तक की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

छोटी जोत से बड़ी सफलता: बृजेश कुमार पटेल बने प्रगतिशील किसान

हाइटेक नर्सरी और उद्यान विभाग के सहयोग से किसान बन रहे आत्मनिर्भर

कम जमीन, नई सोच और आधुनिक खेती से बृजेश कुमार पटेल बने मिसाल

जौनपुर जनपद के विकास खण्ड जलालपुर अंतर्गत ग्राम आदत शाहपुर कलान निवासी किसान बृजेश कुमार पटेल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और विभागीय सहयोग के साथ खेती करे, तो कम भूमि से भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। सीमित संसाधनों और छोटी जोत के बावजूद उन्होंने उद्यानिकी खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है और आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

कृषक का परिचय – प्रगतिशील किसान बृजेश कुमार पटेल इंटरमीडिएट शिक्षित हैं तथा उनके पास कुल 0.506 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे परंपरागत रूप से धान एवं गेहूँ की खेती करते थे, जिससे सीमित आय ही प्राप्त हो पाती थी। खेती में बढ़ती लागत और घटती आमदनी उनके सामने बड़ी चुनौती थी।

शुरुआती संघर्ष और चुनौतियाँ – बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि खेती के शुरुआती दौर में सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था और आधुनिक तकनीकी जानकारी का अभाव था। कम भूमि होने के कारण यह समझना कठिन था कि ऐसी कौन-सी फसल उगाई जाए जिससे पूरे वर्ष परिवार की आजीविका सुचारु रूप से चल सके। पारंपरिक बीज और खाद के प्रयोग से लागत बढ़ती जा रही थी जबकि उत्पादन अपेक्षाकृत कम मिल रहा था।

बदलाव का टर्निंग प्वाइंट – उनके जीवन में परिवर्तन तब आया जब उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में उद्यान विभाग से संपर्क किया। जिला उद्यान अधिकारी श्रीमती सीमा सिंह राणा द्वारा संचालित हाइटेक नर्सरी एवं उन्नत बीज वितरण योजनाओं की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। विभागीय प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से उन्हें यह समझ आया कि खेती केवल परंपरागत कार्य नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रबंधन का माध्यम है। हाइटेक नर्सरी से प्राप्त उन्नत पौधों एवं प्रशिक्षण ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्होंने भिंडी की व्यावसायिक खेती करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने कद्दू, टमाटर, करेला एवं बैंगन जैसी संकर शाकभाजी फसलों की खेती भी प्रारंभ की।

आधुनिक तकनीक से मिली सफलता – बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि भिंडी की खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया। हाइटेक नर्सरी से प्राप्त स्वस्थ पौधों का प्रयोग किया, बेड बनाकर रोपाई की तथा वैज्ञानिक खरपतवार नियंत्रण तकनीक अपनाई और लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखकर खेती की।

      मात्र 10 बिस्वा भूमि पर लगभग रू. 8,000 की लागत लगाकर उन्होंने 60 दिनों में लगभग रू. 60,000 का शुद्ध लाभ अर्जित किया। वर्तमान में भी भिंडी की तुड़ाई से उन्हें लगभग रू. 20,000 अतिरिक्त शुद्ध लाभ मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त हाइटेक नर्सरी कृषि विज्ञान केन्द्र बक्शा से प्राप्त कद्दू, टमाटर, करेला एवं बैंगन के पौधों की खेती से उन्हें लगभग रू. 20,000 का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ।

        बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि खेती में सफलता के लिए बड़ी जमीन नहीं, बल्कि नई सोच और सही तकनीक की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि से लगभग रू. 1 लाख तक का लाभ अर्जित किया। 

अन्य किसानों के लिए संदेश – बृजेश कुमार पटेल अन्य किसानों को संदेश देते हुए कहते हैं कि किसानों को परंपरागत फसलों के सीमित दायरे से बाहर निकलकर तकनीकी एवं वैज्ञानिक खेती अपनानी चाहिए। यदि किसान विभागीय योजनाओं, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग करें, तो कम भूमि से भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।

       उन्होंने अपनी सफलता के लिए मा० मुख्यमंत्री जी, जिला प्रशासन, उद्यान विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बक्शा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन से ही उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यदि किसान सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक खेती अपनाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

About Author