Jaunpur news जिस ‘गुरु’ को सौंपी थी मासूम की तकदीर, वही निकला कातिल! 6 साल के अभिषेक की बेरहमी से हत्या करने वाले ट्यूटर समेत दो को ‘उम्रकैद

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जिस ‘गुरु’ को सौंपी थी मासूम की तकदीर, वही निकला कातिल! 6 साल के अभिषेक की बेरहमी से हत्या करने वाले ट्यूटर समेत दो को ‘उम्रकैद’
​जौनपुर की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: कोर्ट ने माना ‘जघन्य अपराध’, कसाइयों को ताउम्र जेल के साथ ₹4.50 लाख का भारी जुर्माना
​जौनपुर।
कहते हैं कि शिक्षक भगवान का रूप होता है, लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाए, तो इंसानियत का कलेजा कांप उठता है। जौनपुर के शाहगंज में 5 साल पहले हुए एक ऐसे ही रूह कँपा देने वाले ‘अभिषेक अपहरण और हत्याकांड’ में आज अदालत ने अपना सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। ६ वर्षीय मासूम की मफलर से गला घोंटकर निर्मम हत्या करने वाले कसाई ट्यूटर शिवम श्रीवास्तव और उसके साथी आकाश को अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने ताउम्र जेल (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
​इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों दरिंदों पर सवा दो-सवा दो लाख रुपये (कुल ₹4.50 लाख) का भारी-भरकम अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि इस जुर्माने की आधी राशि पीड़ित और बदहवास पिता को दी जाएगी, ताकि इंसाफ की तराजू पर उनके आंसुओं की थोड़ी कद्र हो सके।
​मासूम की चीखें और वो खौफनाक मैसेज: “7 लाख दो, वरना लाश मिलेगी…”
​दिल को चीर देने वाली यह वारदात 2 जनवरी 2021 की है। बैंकर्स कॉलोनी (गौशाला) के रहने वाले दीपचंद्र यादव का 6 साल का लाडला अभिषेक रोज की तरह हंसते-खेलते कोचिंग के लिए निकला था, लेकिन वह कभी लौटकर नहीं आया। दोपहर बाद जब मां प्रियंका की ममता तड़प उठी, तो खोजबीन शुरू हुई। इसी बीच दोपहर 3:27 बजे पिता के मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर एक ऐसा मैसेज था जिसने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।
​मैसेज में लिखा था: “तुम्हारे बच्चे को किडनैप कर लिया गया है। अगर उसकी सलामती चाहते हो तो 7 लाख रुपये का इंतजाम करो। पुलिस को बताया तो बच्चे को जान से मार देंगे!”
​चिरैया मोड़ पर बुना गया था मौत का जाल
​मासूम अभिषेक को क्या पता था कि जिस ट्यूटर (शिवम श्रीवास्तव) से वह ककहरा सीखता था, वही उसकी मौत की पटकथा लिख रहा था। दीपचंद्र के साले आजाद यादव ने अभिषेक को चिरैया मोड़ चौराहे पर शिवम श्रीवास्तव और आकाश शाह के साथ मोटरसाइकिल पर जाते देखा था। उन्होंने सोचा कि ट्यूटर बच्चे को कोचिंग ले जा रहा है, लेकिन वे दरिंदे उसे मौत की घाटी में ले जा रहे थे।
​मफलर से घोंटा गला, बोरी में बंद कर फेंकी लाश
​जब लालची ट्यूटर और उसके साथी की फिरौती की मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने उस मासूम बच्चे पर जरा भी तरस नहीं खाया। ६ साल का बच्चा गिड़गिड़ाता रहा, रोता रहा, लेकिन इन जल्लादों का दिल नहीं पसीजा। आरोपियों ने पहले बच्चे का मुंह दबाया और फिर गले में मफलर का फंदा कसकर उसकी चीखें हमेशा के लिए खामोश कर दीं।
​अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने मासूम के शव को एक बोरी में बंद किया और जमुनिया आईटीआई पानी टंकी के पास फेंक दिया। पुलिस ने जब दोनों को दबोचा, तो उनकी निशानदेही पर:
​मासूम का शव, उसकी स्कूल की किताबें, कॉपियां और चप्पलें बरामद हुईं।
​हत्या में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल, बोरी, प्लास्टिक की रस्सी और वो ‘आलाकत्ल मफलर’ बरामद हुआ, जिससे गला घोंटा गया था।
​अदालत की सख्त टिप्पणी: “यह क्रूरतम और जघन्यतम अपराध है”
​न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने जोरदार पैरवी करते हुए दलील दी कि धन की हवस में एक अबोध बालक की इस क्रूरता से हत्या करना समाज के मुंह पर तमाचा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को देखने के बाद दोनों कातिलों को उनके पापों की सजा सुनाते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
​आज भले ही कातिलों को उम्रकैद मिल गई हो, लेकिन जौनपुर का आसमान और शाहगंज की वो गलियां आज भी उस ६ साल के अभिषेक की किलकारियों को याद कर रो पड़ती हैं। इंसाफ तो मिला… पर उस मां की सूनी गोद अब कभी नहीं भरेगी!

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