Jaunpur news अपने हिस्से का अनाज हम घर ले गये और उनके हिस्से को राख कर दिया

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अपने हिस्से का अनाज हम घर ले गये और उनके हिस्से को राख कर दिया

मछलीशहर तहसील क्षेत्र में इस समय गेहूं की कटाई मड़ाई का काम लगभग समापन की तरफ है। हार्वेस्टर से गेहूं की फसल की कटाई के बाद गेहूं की पराली खेतों में छूटी हुई है।अभी तत्काल इन खेतों में किसानों को किसी फसल की बुआई भी नहीं करनी है और पराली को खेतों में जलाना भी मिट्टी की सेहत के लिए अच्छा भी नहीं है लेकिन कुछ लोगों की आदत ही माचिस मारने की होती है जब तक पराली को आग न लगा दें तब तक कलेजे को ठंडक पहुंचती ही नहीं है।हम इंसानों के घरों में अनाज तो चला गया लेकिन इस पराली पर आश्रित जानवरों का हिस्सा हम भस्म कर देते हैं। तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बहुत जगह जली पराली वाले खेत देखने को मिल जायेंगे। भेड़, बकरियां,गाय,भैंस इस पराली से लाभ उठाती हैं।इस सम्बन्ध में क्षेत्र के बामी गांव के किसान रवीन्द्र सिंह कहते हैं कि गेहूं की पराली में गेहूं की गिरी बालियां और दाने होते हैं जो भेड़ बकरियां बीनकर खा जाती हैं तथा मेड़ों पर हल्की हरी घास होती है जो जानवरों को चरने के काम आती है लेकिन आग लगाने से पराली के साथ- साथ घास भी जलकर राख हो जाती है।अभी तत्काल कोई फसल भी नहीं पैदा करनी है ऐसे में पराली को यथास्थिति में छोड़कर हम चरने वाले जानवरों के प्रति उपकार कर सकते हैं।