Jaunpur news नशीले कफ सिरप के अवैध करोबारी अंकित श्रीवास्तव की ज़मानत याचिका खारिज

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इन्द्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट

नशीले कफ सिरप के अवैध करोबारी अंकित श्रीवास्तव की ज़मानत याचिका खारिज

अपर सत्र न्यायाधीश पशुपति नाथ मिश्र की अदालत इस बहुचर्चित मामले में हो रही थी सुनवाई

कोर्ट ने माना समाज के लिए यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है

जौनपुर। यूपी समेत कई राज्यों में सुर्खियां बटोरने वाले बहुचर्चित प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप (नशीली दवा) के मुख्य कारोबारी अंकित श्रीवास्तव की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी।
अपर सत्र न्यायाधीश पशुपति नाथ मिश्र की अदालत में इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई हो रही थी। खचाखच भरी अदालत में आरोपी की तरफ से उसके अधिवक्ता ने बचाव पक्ष के रूप में कई तर्क दिए लेकिन अपराध की गंभीरता और समाज में फैलने वाले गलत संदेश को देखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
बताते चलें कि यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज एफआईआर संख्या 354/2025 से संबंधित है।
इस बहुचर्चित मामले में पुलिस की स्पेशल जांच टीम ने छानबीन के दौरान यह पाया कि करोड़ों रुपए के इस घोटाले में बहुत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। चार लाख,60 हजार यूनिट कफ सिरप की खरीद-बिक्री के लिए फर्जी दस्तावेजों और रबर स्टैंप का सहारा लिया गया।
जौनपुर के जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय की जांच में पाया गया कि मेसर्स शैली ट्रेडर्स, रांची से भारी मात्रा में ‘न्यू फेन्सिडिल’ कफ सिरप मंगवाया गया था। जिसका प्रयोग नशे के रूप में बिक्री किया गया।आरोप यह भी है कि इस सिरप का उपयोग औषधीय कारणों के बजाय अवैध रूप से नशे के रूप में बेचने के लिए किया गया।
इस बहुचर्चित मामले में अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं (जैसे धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और NDPS एक्ट की धारा 8/21(ग), 27क व 29) के तहत मामला दर्ज है।

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जालसाजी करने में बेहद शातिर है अंकित श्रीवास्तव
जौनपुर। कोडिंन कफ सिरप का प्रयोग नशे के रूप में करने वाला मुख्य अभियुक्त अंकित श्रीवास्तव बेहद ही शातिर जालसाज है। वह वर्तमान में जेल में निरुद्ध है। दस्तावेज़ के अनुसार, उनकी ओर से न्यायालय में ज़मानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। पुलिस और प्रशासन इस पूरे नेटवर्क के अन्य कड़ियों की तलाश में जुटे हैं।
अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और तस्करी के नेटवर्क को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है।

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जांच में हुए बड़े खुलासे

जौनपुर। जांच के दौरान करीब 42.50 करोड़ रुपये मूल्य की 18.28 लाख बोतलों के अवैध रिकॉर्ड का खुलासा हुआ है।
अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी ई-वे बिल के माध्यम से कफ सिरप को झारखंड से जौनपुर आना दिखाया, जबकि भौतिक रूप से यह खेप कभी जौनपुर पहुंची ही नहीं। बरामद कफ सिरप के बैच नंबरों का मिलान त्रिपुरा में पकड़ी गई नशीली दवाओं की खेप से हुआ है, जिससे इसके अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क में शामिल होने की पुष्टि होती है।

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अदालत ने किया सख्त टिप्पणी
जौनपुर। जिले के इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर 02) की अदालत ने पाया कि यह अपराध केवल व्यावसायिक अनियमितता नहीं, बल्कि समाज में नशे को बढ़ावा देने वाला एक गंभीर संगठित अपराध है।
न्यायाधीश ने यह भी संज्ञान में लिया कि आरोपी की पूर्व में उच्च न्यायालय से भी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जनपद के अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-2) पशुपति नाथ मिश्रा की अदालत ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले में अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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शिवम के मामले में भी हुई सुनवाई
जौनपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर 02) की अदालत में शिवम कुमार मौर्य की अग्रिम जमानत याचिका (संख्या- 08/2026) पर सुनवाई हुई। यह मामला कोतवाली थाने में दर्ज ड्रग्स और धोखाधड़ी से संबंधित आरोपों (मुकदमा अपराध संख्या- 357/2025) से जुड़ा है।
एफआईआर औषधि निरीक्षक रजत कुमार द्वारा दर्ज कराई गई थी। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 21(ग), 27(क)/29 के तहत मामला दर्ज है।
अदालत ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं 21(ग), 27(क) / 29 के तहत दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

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