September 1, 2026

Jaunpur news मछलीशहर के इस मेले में खट्टी- मीठी गोलियां बचपन की यादें करा रही ताजा

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मछलीशहर के इस मेले में खट्टी- मीठी गोलियां बचपन की यादें करा रही ताजा

मछलीशहर कस्बे में मछलीशहर जंघई सड़क किनारे लगा मेला जिसमें शाम को कस्बे और तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के बडी संख्या में बच्चे अपने अभिभावकों के साथ रोजना आ- जा रहें हैं।इस मेले में झूले,छोटी ट्रेन, भूतिया घर, चटपटे नाश्ते की दुकानें, सौन्दर्य प्रसाधन की दुकानें,जलपरी का प्रदर्शन जैसा बहुत कुछ है।इसी मेले में चटपटी खट्टी-मीठी गोलियों का एक स्टाल बचपन की यादें ताजा कर रहा है। संतरे की रंग वाली टाफी जिसे देखकर सबके मुंह में पानी आ जाता है।स्टाल पर अलग-अलग कलर की ये खट्टी-मीठी गोलियां प्लास्टिक के पारदर्शी डिब्बों में दस रुपए की एक हैं जिसमें दस से पंद्रह गोलियां हैं। बच्चे अलग-अलग गोलियों का टेस्ट लेकर चार छः डिबिया गोलियां अपने दोस्तों और भाई बहनों के लिए भी खरीद कर ले जा रहे हैं। वैसे बदले समय के साथ लम्बी चौड़ी और महंगे दामों वाली टाफिया भी मार्केट में हैं जो अक्सर बच्चों की आंतों में चिपकर नुकसान भी पहुंचाती हैं। ऐसे में आकार में ये छोटी-छोटी खट्टी-मीठी गोलियां उतनी अधिक नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।इनकी मिठास बचपन की अद्भुत मिठास का एहसास दिलाती हैं।मेले में आये यू के जी के छात्र साहस सिंह कहते हैं ‘सभी गोलियों के एक एक डिब्बी घर ले चलूंगा।पहली बार इस मेले में मिली हैं। बाजार में बिकते तो मैंने देखा ही नहीं।’ बात सही भी है आज के बाजार में बिकने वाली महंगी बड़ी टाफियों ने इन सस्ती खट्टी-मीठी गोलियों को प्रचलन के बाहर कर दिया है। दिखावे वाले इस ज़माने में ये छोटी खट्टी-मीठी गोलियां भले रईसों की पसंद न हो लेकिन इनकी मिठास और आनन्द की बराबरी मल्टीनेशनल कंपनियों की टाफियां कभी नहीं कर सकेंगी।

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