Jaunpur news औषधि निरीक्षक की टीम ने कई मेडिकल स्टोर पर की छापेमारी, हड़कंप
इन्द्रजीत सिंह मौर्य की रिपोर्ट
औषधि निरीक्षक की टीम ने कई मेडिकल स्टोर पर की छापेमारी, हड़कंप
मानक के विपरीत बिना फार्मासिस्ट, बिना फ्रीज के चलते हुए मिली दुकान
दवाओं की खरीद फरोख्त में फर्जीवाड़े का खुलासा, बिलिंग में खेल
जौनपुर। प्रदेश शासन के विशेष निर्देश पर जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय के निर्देशन में गठित स्पेशल टीम ने सोमवार को आधा दर्जन ग्रामीण बाजारों में मेडिकल स्टोर की दुकानों के लाइसेंस चेक किये। इस दौरान अवैध दवा व्यापार, बिना फार्मासिस्ट और बिना फ्रिज के संचालित किये जा रहे मेडिकल स्टोर की दुकानों की बेहद ही गहराई से जांच पड़ताल की गई।
नियमों की अनदेखी के खिलाफ चलाए गए इस विशेष अभियान की जद में बक्शा विकास खंड के धनियामऊ बटाऊवीर में कई ऐसे दुकानदार चिन्हित किए गए जहां नियम कानून को ताक पर रखकर बेहद ही गैर जिम्मेदारी के साथ मेडिकल स्टोर संचालित किये जा रहे थे।
प्रथम दृष्टया उन्हें गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित फर्मों को कड़ी चेतावनी जारी की गई।
जिला ड्रग इंस्पेक्टर रजत कुमार पांडेय की टीम सबसे पहले धनियामऊ स्थित गुप्ता मेडिकल स्टोर पहुंची।
यहां जांच में पाया गया कि दुकान पर कोई भी फार्मासिस्ट मौजूद नहीं था । दवाओं की बिक्री बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ की देखरेख में की जा रही थी। इसके अलावा, दवाओं की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए सेल इनवॉइस (बिक्री बिल) पर मरीजों का विवरण भी दर्ज नहीं किया गया था।
इस लापरवाही को देखते हुए औषधि निरीक्षक ने ड्रग्स रूल 1945 के तहत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संचालक को सख्त चेतावनी दी है।
बटाऊबीर स्थित विजय मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक खामियां उजागर हुईं। ग्राहकों को
बिना बिल वाउचर के ही गंभीर रोगों की दवाई दी जा रही थी। कई महत्वपूर्ण दवाओँ को रखने के लिए दुकानदार से जब फ्रिज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि फ्रिज नहीं है। कैश मेमो जारी न करना और दुकान में फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) की अनुपलब्धता, जो तापमान-संवेदनशील दवाओं के रखरखाव के लिए अनिवार्य है। इन खामियों को सुधारने के लिए दुकान संचालक को एक सप्ताह का समय दिया गया है।
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नियमों की अनदेखी पर होगी जेल और लाइसेंस रद्दीकरण
जौनपुर।
जिला ड्रग इंस्पेक्टर रजत कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर दोनों फर्में अपनी खामियों को जल्द दूर नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियमावली 1945 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसमें लाइसेंस निलंबन के साथ ही रद्दीकरण और मुकदमा दर्ज कराने के बाद जेल भेजे जाने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
