Jaunpur news हाईकोर्ट चीफ जस्टिस का सख्त आदेश: चाइनीज मांझा पर पूरे प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लागू हो
हाईकोर्ट चीफ जस्टिस का सख्त आदेश: चाइनीज मांझा पर पूरे प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लागू हो
2015 के आदेश के अनुपालन में लापरवाही पर कोर्ट सख्त
जौनपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने चाइनीज मांझा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि जौनपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि इस विषय में हाईकोर्ट पहले ही वर्ष 2015 में प्रतिबंध का आदेश पारित कर चुकी है, बावजूद इसके आज तक उसका समुचित अनुपालन नहीं हुआ। पूर्व में पारित न्यायिक आदेशों का पालन करना राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। जब भी पतंगबाजी का मौसम अपने चरम पर हो, तब राज्य सरकार की यह विशेष जिम्मेदारी है कि चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण रोक सुनिश्चित की जाए, क्योंकि यह मनुष्य एवं पक्षियों के जीवन के लिए अत्यंत घातक है।
यह जनहित याचिका जौनपुर में चाइनीज मांझा से हुई गंभीर और जानलेवा घटनाओं को आधार बनाकर दाखिल की गई थी। याचीगण की ओर से अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने अदालत को बताया कि 11 दिसंबर 2025 को अपनी पुत्री को स्कूल छोड़कर लौट रहे अध्यापक संदीप तिवारी की शास्त्री ब्रिज पर चाइनीज मांझा से गला कटने के कारण मृत्यु हो गई। इससे पूर्व 15 सितंबर 2015 को उत्तम दुबे की भी इसी कारण मौत हो चुकी है।
अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि अधिवक्ता आशीष शुक्ला, शिवराज यादव, रवि सिन्हा, भुवन अस्थाना, पृथ्वी नाथ तिवारी के अलावा राहगीर सोल्जर यादव, एम.आर. दिव्यांशु सिंह, शिवनाथ पाठक सहित कई लोग चाइनीज मांझा से गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
*जनहित याचिका दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव,विकास तिवारी एवं नरेंद्र कुमार जायसवाल द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव एवं जिलाधिकारी जौनपुर के विरुद्ध दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि चाइनीज मांझा में प्रयुक्त सिंथेटिक धागा, शीशे का पाउडर एवं गोंद इसे रेजर ब्लेड की तरह तेज धार वाला बना देता है, जो कपड़े पहनने के बावजूद शरीर के किसी भी हिस्से को काट सकता है। इससे मानव जीवन के साथ-साथ पशु एवं पक्षियों का जीवन भी लगातार संकट में है।
यह भी कहा गया कि चाइनीज मांझा नॉन-बायोडिग्रेडेबल है, जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है, जो संविधान के अनुच्छेद 48-ए एवं 51-ए(ग) का उल्लंघन है। पर्यावरण के अनुकूल सूती धागे का उपयोग पतंग उड़ाने में सुरक्षित विकल्प हो सकता है। सड़क पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है।
याचीगण द्वारा जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, किंतु कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। मृतकों एवं घायलों से संबंधित समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की प्रतियां भी न्यायालय में दाखिल की गईं।
सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मानव जीवन, पशु-पक्षियों एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिए चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए।
