Jaunpur news सप्त शक्ति संगम में नारी शक्ति का वंदन, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाएं सम्मानित
सप्त शक्ति संगम में नारी शक्ति का वंदन, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाएं सम्मानित
जौनपुर। विद्या भारती के तत्वावधान में गुरुवार को सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बारीनाथ में ‘सप्त शक्ति संगम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय मातृ शक्ति वंदन, नारी की गरिमा एवं शक्ति, ज्ञान की ज्योति तथा संस्कृति-संस्कारों की पावन धारा रहा। इस अवसर पर शिक्षा, कला, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सीमा सिंह (परामर्शदाता, जिला महिला चिकित्सालय), उर्वशी सिंह (अधिवक्ता, अतुल्य वेलफेयर ट्रस्ट), डॉ. वंदना सरकार (प्रधानाध्यापक) एवं डॉ. ज्योति सिंह द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
छात्राओं ने रानी लक्ष्मीबाई, रानी अहिल्याबाई सहित अन्य महान विभूतियों के रूप में नारी शक्ति का प्रभावशाली मंचन कर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। मुख्य अतिथि डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि भारत के विकास की मजबूत नींव मातृ शक्ति के अद्वितीय योगदान पर आधारित है। नारी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की भी सशक्त आधारशिला है।
विशिष्ट अतिथि उर्वशी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मातृ शक्ति के बिना भारत का समग्र विकास संभव नहीं है। नारी के सशक्त होने से समाज समृद्ध होता है और राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूता है। इसलिए नारी का सम्मान, सशक्तिकरण और समान अवसर विकसित भारत की अनिवार्य शर्त है।
कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रीति गुप्ता, वंदना यादव, साधना खरवार, पुष्पांजलि साहू तथा पत्रकारिता क्षेत्र में रजनी सोनी को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मंच से संकुल प्रमुख कल्पना सिंह ने समाज में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन आचार्या वंदना अस्थाना ने किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य गणेश दत्त उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में साधना दूबे, अरूसी मौर्या, आरती प्रजापति, सोनी निषाद, अंजली मौर्या, शालिनी श्रीवास्तव एवं रचना सोनकर सहित अन्य की सक्रिय भूमिका रही।
