Jaunpur news जौनपुर के 28 थानों में अब भी सक्रिय हैं सैकड़ों कुख्यात पशु तस्कर
जौनपुर के 28 थानों में अब भी सक्रिय हैं सैकड़ो कुख्यात पशु तस्कर
तस्करी के दौरान पुलिस पर हमला, फायरिंग और हिंसा आम बात
राजनीतिक संरक्षण और कुछ वर्दीधारियों की संलिप्तता से फल-फूल रहा अवैध कारोबार
जौनपुर।
Jaunpur news जिले के 28 थानों के क्षेत्र में आज भी करीब सैकड़ो कुख्यात पशु तस्कर सक्रिय हैं, जिन पर न तो पुलिस पूरी तरह लगाम लगा पा रही है और न ही उन्हें कानून के शिकंजे में कसने में पूरी तरह सफल हो रही है। ये तस्कर इतने दुस्साहसी और हिंसक हो गए हैं कि पुलिस चेकिंग के दौरान थानेदार और कांस्टेबल के टॉर्च दिखाते ही उन पर हमला करना, गाड़ी चढ़ा देना या गोलियां चला देना इनके व्यवहार का हिस्सा बन चुका है।
पशु तस्करी के दौरान लाखों रुपये कीमत की दुधारू भैंसें, गायें और बछड़े जबरन खोल ले जाना और विरोध करने पर पशुपालकों पर ईंट-पत्थर बरसाना इन तस्करों की आम प्रवृत्ति बन गई है। इनका रवैया इतना निर्मम होता है कि इनके सामने आने वालों के प्रति तनिक भी दया नहीं होती।
बीती रात इसी दुस्साहस का शिकार हुए कांस्टेबल दुर्गेश सिंह, जो एक पशु तस्करी रोकने के प्रयास में शहीद हो गए। हालांकि, तत्काल सक्रिय हुई एसओजी टीम ने कार्रवाई करते हुए जलालपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरापुर कोटवा निवासी कुख्यात तस्कर सलमान पुत्र मुसाफिर को मुठभेड़ में मार गिराया। बाकी फरार तस्करों की तलाश जारी है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में भारी संख्या में पुलिस बल, खुफिया इकाइयाँ और स्थानीय सूचना तंत्र (LIU) मौजूद हैं, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में तस्कर कैसे सक्रिय हैं? यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण और कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत इस अपराध को संरक्षण दे रही है।
खेतासराय: एक थाना क्षेत्र में 84 तस्कर पंजीकृत
जौनपुर।
खेतासराय थाना क्षेत्र की बात करें तो यहां पुलिस रिकॉर्ड में 84 पशु तस्कर पंजीकृत हैं। इनमें से दर्जनभर को पूर्व में जेल भेजा जा चुका है। हाल ही में पुलिस ने छापेमारी कर 13 और तस्करों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा है। थानाध्यक्ष रामाश्रय राय के अनुसार, रानीमऊ के कुख्यात अब्दुल सलाम उर्फ बिल्ला और दिलशाद अहमद समेत उनके बेटों व रिश्तेदारों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट सहित गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा चुकी है।
