कुटीर संस्थान चक्के के व्यवस्थापक डॉ अजय कुमार दुबे के आवास पर एक दिवसीय कथा का हुआ आयोजन

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कुटीर संस्थान चक्के के व्यवस्थापक डॉ अजय कुमार दुबे के आवास पर एक दिवसीय कथा का हुआ आयोजन। ——‐ भेदभाव रहित होने पर ही हो सकता है परमात्मा से मिलन- राजराजेश्वरी शक्तिपीठ भादीश्वर चक्र सुदर्शनपुरी श्री श्री 1008 श्री जगद्गुरु श्री हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज।। ——-कुटीर संस्थान चक्के के व्यवस्थापक एवं कुटीर पीजी कॉलेज चक्के के प्रबंधक डॉ अजयेन्द्र कुमार दुबे के चक्के स्थित आवास पर एक दिवसीय कथावाचन एवं आशीर्वचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रयागराज की पावन धरती से पधारे श्री हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भगवत गीता के चौथे अध्याय का उल्लेख करते हुए गीता के आर्षकाल पर प्रकाश डाला,साथ ही भगवद गीता के साथ-साथ शिव गीता, भगवतीगीता,यमगीता एवं भारत गीता सहित गीता के सभी स्वरूपों से श्रोताओं का सामान्य बोध करवाया। तपस्या के तीन रूप -शारीरिक, मानसिक एवं वाणी तपस्या की विस्तृत व्याख्या करते हुए गायत्री मंत्र की महत्ता से भी लोगों को परिचित कराया ।साथ ही यह भी कहा कि भागवत, उपनिषद ,पुराण एवं रामचरितमानस जैसे सभी ग्रंथ हमें भेदभाव रहित रहने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भेदभाव रहित होने पर ही परमात्मा से मिलन संभव हो सकता है। भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म की मूल विचारधारा को प्रकट करते हुए सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया के उद्घोष के साथ ही विश्व कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा देने के साथ ही रोचक, मर्मस्पर्शी एवं मार्गदर्शक कथा का आशीर्वचन के साथ समापन हुआ ।डॉ अजयेन्द्र कुमार दुबे ने सभी श्रोताओं एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्री भूषण मिश्र, चंद्रदेव, रामसागर,डॉक्टर श्री निवास तिवारी ,पंडित अविनाश दुबे, डॉ दिवाकर मिश्र,शिवानंद शुक्ला,राकेश मिश्रा, कृष्ण प्रताप दुबे,काशीनाथ दुबे, विजय भारत सिंह,पूर्व प्रधान जयप्रकाश यादव,श्यामजीत पांडे सहित शिक्षा संकाय के सभी शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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