​jaunpur news कोर्ट का हंटर: पीड़ित परिवारों का हक मारने वाली दो नामी बीमा कंपनियों पर कड़ा एक्शन, 1.28 करोड़ की आरसी जारी!

Share

​कोर्ट का हंटर: पीड़ित परिवारों का हक मारने वाली दो नामी बीमा कंपनियों पर कड़ा एक्शन, 1.28 करोड़ की आरसी जारी!
​जौनपुर। आम जनता की गाढ़ी कमाई से प्रीमियम वसूलने वाली और क्लेम देने के वक्त टालमटोल करने वाली बड़ी बीमा कंपनियों को जौनपुर की अदालत ने कड़ा सबक सिखाया है। सड़क दुर्घटना में अपनों को खो चुके दो पीड़ित परिवारों को कोर्ट के आदेश के बाद भी मुआवजा न देना दो दिग्गज कंपनियों को भारी पड़ गया। अधिकरण के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ और ‘टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ के खिलाफ कुल 1.28 करोड़ रुपये की आरसी जारी कर दी है।
​अब जिले के कलेक्टर (डीएम) के माध्यम से इन कंपनियों से पाई-पाई वसूली जाएगी। कोर्ट ने अगली सख्त कार्रवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।

​मामला 1: ठेकेदार की मौत पर ‘द न्यू इंडिया इंश्योरेंस’ की मनमानी, कोर्ट ने कसी नकेल
​सिकरारा थाना क्षेत्र के बांकी गाँव निवासी ईंट-भट्टा ठेकेदार बृजेश कुमार सिंह उर्फ नन्हकऊ की 13 जुलाई 2021 को जलालपुर के मकरा चौराहे के पास कर से जाते समय दर्दनाक ट्रक दुर्घटना में मौत हो गई थी। परिवार का सहारा छिन जाने के बाद परिजनों ने अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव के माध्यम से हक की लड़ाई लड़ी।
​कोर्ट ने ट्रक मालिक, चालक और द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया था कि वे पीड़ित परिवार को ब्याज सहित 63 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति 2 महीने के भीतर दें। लेकिन, रसूखदार बीमा कंपनी कोर्ट के आदेश को ठेंगे पर रखकर बैठ गई। अब कोर्ट के हंटर के बाद कंपनी के होश फाख्ता हैं।

​मामला 2: राजस्व कर्मी की मौत पर ‘टाटा एआईजी’ ने मोड़ा था मुंह, अब कलेक्टर करेंगे वसूली
​दूसरा मामला खुटहन के बनुआडीह का है। यहाँ के निवासी और शाहगंज राजस्व विभाग में अनुसेवक के पद पर तैनात शिवकांत दुबे की बाइक से जाते समय एक तेज रफ्तार बुलेट की टक्कर से मौत हो गई थी। लाचार परिवार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई।
​अदालत ने 27 फरवरी 2026 को कंपनी को ब्याज सहित 65 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया था। लेकिन कॉर्पोरेट रवैया अपनाते हुए कंपनी ने पीड़ित परिवार को भटकने के लिए छोड़ दिया। जब पीड़ित पक्ष ने वसूली की अर्जी लगाई, तो कोर्ट ने टाटा एआईजी की इस लापरवाही पर बिजली गिराते हुए आरसी जारी कर दी।

​📢 समाज के हित में बड़ा संदेश: ‘दावे बड़े-बड़े, पर देने के वक्त हाथ खड़े’ करने वालों पर अदालती प्रहार
​यह फैसला समाज के उन लाखों लोगों के लिए एक नजीर है जो हर महीने बीमा कंपनियों को प्रीमियम तो ईमानदारी से देते हैं, लेकिन जब उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो ये कंपनियां कागजी दांव-पेंच में फंसाकर उन्हें दफ्तरों के चक्कर कटवाती हैं। जौनपुर कोर्ट के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि गरीबों और पीड़ितों के आंसुओं का मज़ाक उड़ाने की इजाजत किसी भी कॉर्पोरेट घराने को नहीं दी जाएगी।
​अब कंपनियों की खैर नहीं, क्योंकि अगर वो खुद से मुआवजा नहीं देंगी, तो प्रशासन उनकी संपत्ति कुर्क कर पीड़ितों को न्याय दिलाएगा!

About Author