Jaunpur news खाकी और आबकारी की ‘वसूली गैंग’ पर कोर्ट का चाबुक! डीएम-डीओ के नाम पर धमकाकर झटके रुपये, सीजेएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज

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जौनपुर: खाकी और आबकारी की ‘वसूली गैंग’ पर कोर्ट का चाबुक! डीएम-डीओ के नाम पर धमकाकर झटके रुपये, सीजेएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज
​जौनपुर। सरकारी रसूख और पद की धमक दिखाकर जनता को दुधारू गाय समझने वाले अफसरों के खिलाफ कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जौनपुर में जिलाधिकारी (DM) और जिला आबकारी अधिकारी (DO) के नाम पर ‘ऊपर तक’ सरकारी खर्च पहुंचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सीजेएम कोर्ट के कड़े तेवर के बाद लाइनबाजार पुलिस ने आबकारी निरीक्षक आदित्य सिंह और आबकारी पुलिसकर्मी शूजाउद्दीन के खिलाफ धोखाधड़ी, उगाही, धमकी और पद के दुरुपयोग की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

​इस हाई-प्रोफाइल मामले ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें ‘ऊपर’ तक के अफसरों के नाम पर वसूली का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

‘ऊपर तक देना है खर्च…’ वसूली का पूरा खेल
​लाइनबाजार थाना क्षेत्र के हुसेनाबाद निवासी राकेश कुमार सिंह की पत्नी चौरी बाजार (जलालपुर) में देशी शराब की दुकान संचालित करती थीं। आरोप है कि 24 अगस्त 2024 को आबकारी सिपाही शुजाउद्दीन ने पीड़ित को फोन घुमाया और कहा— “विभाग में आकस्मिक खर्च आ गया है, जिसे ऊपर तक देना है।”
​इसके बाद सिपाही ने आबकारी निरीक्षक आदित्य सिंह से बात कराई। जब पीड़ित ने पैसे देने से इनकार किया, तो इंस्पेक्टर ने जो कहा वह व्यवस्था को शर्मसार करने वाला था।
​इंस्पेक्टर का फरमान: “डीओ साहब (जिला आबकारी अधिकारी) की तरफ से सरकारी खर्च आया है और डीएम साहब का आर्डर है। कुल 60,000 रुपये का खर्चा है, जिसमें से तुम्हारे हिस्से में सिर्फ 1800 रुपये आए हैं। थोड़ा-थोड़ा करके सब दुकानों से ले रहा हूं।”

दुकान सीज करने और पत्नी को जेल भेजने की धमकी
​जब पीड़ित ने असमर्थता जताई, तो इंस्पेक्टर और सिपाही अपनी औकात पर उतर आए। पीड़ित को धमकाया गया कि अगर पैसे नहीं दिए तो दुकान सीज कर दी जाएगी और उसकी पत्नी को जेल भिजवा दिया जाएगा। इस खौफ के कारण पीड़ित ने उसी दिन दफ्तर जाकर 1800 रुपये इंस्पेक्टर को सौंप दिए।
​आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं था; इंस्पेक्टर आदित्य सिंह हर महीने 1500 रुपये और औचक निरीक्षण के नाम पर 500 रुपये की बंधी-बंधाई रिश्वत वसूलता था। यही नहीं, इलाके की भांग की दुकानों से भी अवैध रूप से लाखों की काली कमाई की जा रही थी।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और पेनड्राइव लेकर भटकता रहा पीड़ित, रसूखदारों ने दबाई फाइल
​पीड़ित राकेश कुमार सिंह ने इस पूरी वसूली और धमकी की बातचीत को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। यह सबूत इतना पुख्ता था कि बड़े से बड़े भ्रष्टाचारी की कुर्सी हिल जाए, लेकिन महकमे के बड़े अफसरों ने अपने मातहतों को बचाने की पूरी कोशिश की:

​तत्कालीन आबकारी अधिकारी उमेश चंद्र पांडेय: पीड़ित ने इन्हें ऑडियो सुनाया, लेकिन साहब ने कोई कार्रवाई नहीं की।

​आबकारी आयुक्त वाराणसी प्रभार: जून और जुलाई 2025 में लिखित शिकायत, बयान और ऑडियो टेप की पेनड्राइव सौंपी गई, लेकिन रसूख के आगे फाइल दबा दी गई।
​पुलिस अधीक्षक (SP) जौनपुर: उच्चाधिकारियों से निराश होकर पीड़ित ने एसपी से गुहार लगाई, लेकिन वहां भी खाकी ने खाकी का साथ दिया और कोई सुनवाई नहीं हुई।

जब सिस्टम सो गया, तब कोर्ट ने दिखाया ‘सिंघम’ अवतार
​जब न्याय के सारे दरवाजे बंद हो गए, तब पीड़ित ने सीजेएम कोर्ट की चौखट पर दस्तक दी। कोर्ट ने मामले को प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर और लोक सेवक के पद का घोर दुरुपयोग माना। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
​9 जून 2026 को आखिरकार कोर्ट के डंडे के बाद लाइनबाजार थाने में दोनों भ्रष्ट आबकारी कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और एफआईआर की कॉपी कोर्ट में दाखिल की गई।

मुख्य बिंदु:

मुख्य आरोप
आदित्य सिंह-आबकारी निरीक्षक-
पद का दुरुपयोग, ₹60,000 की वसूली का दबाव, मासिक रिश्वतखोरी

शूजाउद्दीन-आबकारी पुलिसकर्मी-
अवैध वसूली के लिए फोन पर धमकी, सिंडिकेट संचालन

बड़ा सवाल: क्या 1800 रुपये की यह छोटी वसूली महज एक बानगी है? डीएम और डीओ के नाम पर चल रहे इस 60,000 रुपये के ‘सरकारी खर्च’ के रैकेट में आबकारी विभाग के और कितने बड़े मगरमच्छ शामिल हैं, अब इसकी जांच होनी तय है। कोर्ट के इस कदम से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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