Jaunpur news हीटवेव एवं हीट स्ट्रेस से पशुओं के बचाव हेतु पशुपालकों को एडवाइजरी जारी

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हीटवेव एवं हीट स्ट्रेस से पशुओं के बचाव हेतु पशुपालकों को एडवाइजरी जारी

जौनपुर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जौनपुर डॉ0 ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जनपद के समस्त पशुपालकों से अपील करते हुए बताया कि लगातार बढ़ते तापमान एवं हीटवेव की स्थिति के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अत्यधिक गर्मी एवं आर्द्रता के कारण पशुओं की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तथा दुग्ध उत्पादन में कमी, शारीरिक कमजोरी एवं विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से छोटे बछड़े, गहरे रंग के पशु, अधिक दूध देने वाले पशु, गर्भित पशु, अधिक वजन वाले पशु तथा कम पसीना देने वाले पशु हीट स्ट्रेस से अधिक प्रभावित होते हैं।

       मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि हीट स्ट्रेस से प्रभावित पशुओं में टांग फैलाकर लेटना, अत्यधिक हांफना, सूखी नाक, मांसपेशियों में कंपन, शरीर में कमजोरी, पानी अधिक पीना, भोजन कम करना, दूध उत्पादन में कमी तथा अचानक मृत्यु जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पक्षियों में चोंच खोलकर सांस लेना एवं पंख फैलाकर बैठना भी हीट स्ट्रेस के प्रमुख संकेत हैं।

    उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को दिन के समय छायादार एवं हवादार स्थान पर रखें तथा दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष सावधानी बरती जाए। पशुओं को स्वच्छ एवं ठंडा पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए तथा धूप में रखा गर्म पानी न पिलाया जाए। शेड में स्प्रिंकलर, मिस्ट फैन एवं एग्जॉस्ट फैन की व्यवस्था करने के साथ-साथ फॉगिंग भी कराई जाए।

    मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पशुओं को दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहलाएं तथा भैंसों के लिए तालाब या पानी में बैठने की व्यवस्था की जाए। शेड के दरवाजों एवं खिड़कियों पर गीले टाट अथवा जूट के बोरे लगाने तथा छत पर भूसा, पराली या सफेद पेंट/चूना कराने से तापमान को कम किया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि पशुओं को संतुलित आहार दिया जाए तथा खली, दाना, चोकर एवं हरे चारे की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित की जाए। पशुओं के आहार में इलेक्ट्रोलाइट एवं मिनरल मिक्सचर का प्रयोग लाभकारी होता है। दुग्ध देने वाले पशुओं को सामान्य से लगभग दोगुना ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए।

    मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों से तालाब, पोखरों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पशु-पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही आमजन से भी घरों के बाहर खुले बर्तनों में पशु-पक्षियों हेतु पानी रखने का अनुरोध किया गया।

     उन्होंने बताया कि लू अथवा हीट स्ट्रेस के लक्षण दिखाई देने पर पशुओं को तत्काल ठंडे पानी से नहलाएं तथा निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। आवश्यकता पड़ने पर टोल फ्री नंबर 1962 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

     मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने सभी पशुपालकों से अपील की कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर नजर रखें तथा हीटवेव से बचाव संबंधी उपाय अपनाकर पशुओं को सुरक्षित रखें।

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