Jaunpur news कार’ में खोजा ‘हेलमेट’: जौनपुर यातायात पुलिस का कारनामा, चार पहिया का काट दिया ‘बिना हेलमेट’ का चालान!
‘कार’ में खोजा ‘हेलमेट’: जौनपुर यातायात पुलिस का कारनामा, चार पहिया का काट दिया ‘बिना हेलमेट’ का चालान!
अजब यूपी पुलिस का गजब खेल: कार नंबर UP 62 CN 5834 पर ठोंका ₹1000 का जुर्माना; ड्राइवर नहीं बताने पर जेल भेजने की भी धमकी
जौनपुर। हिमांशु श्रीवास्तव एडवोकेट
उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस अपनी अनोखी और ‘हाई-टेक’ कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला जौनपुर का है, जहाँ यातायात पुलिस ने आधुनिकता और मुस्तैदी की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर कोई भी अपना सिर पकड़ ले। पुलिस ने एक सम्मानित डॉक्टर की चार पहिया कार का चालान सिर्फ इसलिए काट दिया क्योंकि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था! जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा—कार में हेलमेट!
क्या है पूरा मामला?
सहकारी कॉलोनी, रुहट्टा के निवासी डॉ. विनोद सिंह गत 16 मई 2026 की शाम करीब 6:24 बजे अपने ड्राइवर के साथ अपनी कार (संख्या: UP 62 CN 5834) से दीदारगंज-खेतासराय मार्ग से गुजर रहे थे। सब कुछ सामान्य था, लेकिन जब चालान का नोटिस डॉक्टर साहब के हाथ में पहुंचा तो उनके होश उड़ गए।
यातायात पुलिस द्वारा भेजे गए इस ई-चालान में बकायदा लिखा है:
वाहन की श्रेणी: मोटर कार (Four Wheeler)
वाहन नंबर: UP 62 CN 5834
जुर्म: दो पहिया वाहन बिना हेलमेट के चलाना!
शमन शुल्क: ₹1,000
गजब का विरोधाभास: पुलिस के सिस्टम ने खुद माना कि वाहन ‘मोटर कार’ है, लेकिन चालान काटने वाले ‘सुलतान’ को उसमें दो पहिया नजर आया और बिना हेलमेट का जुर्माना ठोंक दिया। इसे अंधाधुंध चालान का प्रेशर कहें या पुलिस की लापरवाही का चरम?
’जेल भेज देंगे…’ पुलिस की घुड़की ने बढ़ाया गुस्सा
लापरवाही सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित नहीं रही। यातायात पुलिस निदेशालय द्वारा जारी इस नोटिस में डॉक्टर विनोद सिंह को बाकायदा डराया भी गया है। नोटिस में लिखा है कि:
नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर वह पुलिस को बताएं कि उस समय कार कौन चला रहा था, उसका ड्राइविंग लाइसेंस और पूरी जानकारी सौंपें।
यदि वह चालक की जानकारी नहीं देते हैं, तो उन्हें ₹500 का जुर्माना या 3 महीने की जेल (अथवा दोनों) भुगतनी पड़ सकती है।
यानी गलती पुलिस के सिस्टम की, मानसिक प्रताड़ना भुगते आम नागरिक!
अब कोर्ट में खिंचेगी पुलिस: विधिक कार्रवाई की तैयारी
इस हास्यास्पद और प्रताड़ित करने वाले नोटिस के बाद डॉक्टर विनोद सिंह और उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। डॉ. विनोद के अधिवक्ता घनश्याम ओझा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को कोर्ट में घसीटने का मन बना लिया है।
अधिवक्ता घनश्याम ओझा का कहना है:
”यह उत्तर प्रदेश पुलिस यातायात निदेशालय की घोर लापरवाही और आम जनता का उत्पीड़न है। कार का हेलमेट में चालान काटना हास्यास्पद तो है ही, साथ ही जेल भेजने की धमकी देना मानसिक शोषण है। इस बेलगाम कार्यप्रणाली के खिलाफ हम चुप नहीं बैठेंगे। यातायात पुलिस के खिलाफ बहुत जल्द न्यायालय में विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
बड़ा सवाल: आखिर कब सुधरेगी व्यवस्था?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब यूपी पुलिस के कैमरों और डिजिटल चालान सिस्टम ने ऐसा ‘चमत्कार’ किया हो। सवाल यह उठता है कि:
क्या चालान अप्रूव करने से पहले कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इसे चेक नहीं करता?
क्या सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिए आँख बंद करके चालान भेजे जा रहे हैं?
कार में हेलमेट ढूंढने वाली इस ‘दूरदर्शी’ पुलिस पर कार्रवाई कौन करेगा?
अब देखना यह है कि न्यायालय का डंडा चलने से पहले जौनपुर के आला अधिकारी इस ‘ऐतिहासिक’ भूल को सुधारते हैं या पुलिस की इस फजीहत पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती है।
