February 8, 2026

Jaunpur news श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कंस वध व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग

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श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कंस वध व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग

तालामझवारा पड़ान चल रहे सात दिवसीय श्री मद भागवत कथा के छठे उम्दा श्रोताओं का सैलाब
जफराबाद।तालामझवारा पड़ान में पंडित शारदा प्रसाद पाण्डेय के आवास पर चल सात दिवसीय श्री मद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महापुराण के छठे दिन काशी से पधारे कथावाचक पंडित निलेश महाराज वेंकटेश ने कथा का शुभारंभ करते हुए कंस वध व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग बहुत मार्मिक ढंग से सुनाए।उन्होंने कहाकि जब कंस के अत्याचार से पृथ्वीवासी भगवान से गुहार लगाने लगे तब भगवान अवतरित हुए और कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को कई बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास असफल साबित होता रहा। कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने 11 वर्ष की अल्पायु में कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने माता-पिता वसुदेव और देवकी और महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया।रुक्मिणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा व्यास रमेश पाराशर ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथावाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। इस दौरान भारी संख्या में श्रोता मौजूद रहे

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