Jaunpur news महिला नेतृत्व से मजबूत होगा लोकतंत्र, शिक्षा और समान अवसर पर जोर
महिला नेतृत्व से मजबूत होगा लोकतंत्र, शिक्षा और समान अवसर पर जोर
मछलीशहर में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम एवं विकसित भारत@2047’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
मछलीशहर, जौनपुर। बिहारी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से ‘Gender Democracy and Transformation: नारी शक्ति वंदन अधिनियम एवं विकसित भारत@2047’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश और समाज के विकास में महिलाओं की भागीदारी, लैंगिक समानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और महिला नेतृत्व जैसे विषयों पर शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व देने के बजाय उन्हें शिक्षा, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य, डिजिटल ज्ञान और निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण का दायरा राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन भी इसके महत्वपूर्ण आधार हैं।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के पूर्व निदेशक एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य वासुदेव यादव ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नेतृत्व के समान अवसर मिलने से समाज अधिक सशक्त और समावेशी बन सकता है।
विशिष्ट अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शिक्षक शिक्षा संकाय के पूर्व डीन एवं टीडी कॉलेज के प्रो. अजय कुमार दुबे ने कहा कि लैंगिक समानता की स्थापना में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम है। विद्यार्थियों में समानता, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना विकसित करके सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ. राजकुमार यादव ने महिला सशक्तीकरण को सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सहभागिता के बिना विकसित भारत की संकल्पना अधूरी रहेगी।
समापन सत्र में भी महिला सशक्तीकरण पर मंथन
संगोष्ठी के समापन सत्र के मुख्य अतिथि गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर के प्रो. राकेश यादव ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को शिक्षा, सामाजिक चेतना और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़कर व्यापक रूप देने की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. शशिकांत यादव ने कहा कि लैंगिक लोकतंत्र स्थापित करने के लिए समाज में मौजूद रूढ़ियों और असमानताओं को दूर करना होगा।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. आशीष तिवारी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि संचालन बीएड विभाग के डॉ. सुशील मिश्र ने किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए प्राध्यापकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
इस दौरान फौजदार इंटर कॉलेज के प्रबंधक अजय प्रताप यादव, प्रधानाचार्य राजेश कुमार दुबे, डोभी से प्रो. कुमुद त्रिपाठी, चक्के से डॉ. योगेश पाठक, सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के डॉ. यज्ञेश चतुर्वेदी, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. अनुराग मिश्र, रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के डॉ. रजनीश कुमार, खन्ना कॉलेज प्रयागराज के डॉ. हरीश सिंह, डॉ. अरविंद यादव, डॉ. अश्विनी गुप्ता, डॉ. विनोद यादव तथा टीडी कॉलेज की शोधार्थी अंकिता तिवारी सहित अन्य शिक्षाविदों ने विचार रखे।
दो दिवसीय संगोष्ठी में महिला नेतृत्व, लैंगिक लोकतंत्र, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विकसित भारत@2047 से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अकादमिक चर्चा हुई। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं को समान अवसर और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी देकर ही समावेशी एवं आत्मनिर्भर समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
