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शाही किले का नाम बदलना ऐतिहासिक विरासत से खिलवाड़ : आरिफ हबीब

जौनपुर। समाजवादी पार्टी के ज़िला महासचिव एवं व्यापार मंडल के ज़िला महामंत्री आरिफ हबीब ने जौनपुर के ऐतिहासिक शाही किले का नाम बदलकर केवल “जौनपुर किला” किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के नाम उनकी पहचान और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
सत्ता के इशारे पर ऐतिहासिक नामों में बदलाव करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि इससे जौनपुर की सांस्कृतिक साझी विरासत और ऐतिहासिक पहचान के साथ खिलवाड़ होता है।

आरिफ हबीब ने कहा कि जौनपुर का शाही किला केवल ईंट-पत्थरों से बनी कोई इमारत नहीं है, बल्कि यह जौनपुर के गौरवशाली इतिहास, स्थापत्य कला और सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे ऐतिहासिक स्थलों के नाम को बदलने के बजाय उनके इतिहास और महत्व को संरक्षित एवं प्रचारित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता, इतिहास से सीखा जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों को अपने शहर की वास्तविक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जौनपुर की पहचान उसकी साझी संस्कृति, भाईचारे, साहित्य, संगीत, स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत से बनी है। किसी ऐतिहासिक नाम को बदलने की बजाय सरकार को चाहिए कि शाही किले सहित जौनपुर की तमाम ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास पर ठोस कार्य करे।

आरिफ हबीब ने कहा कि जौनपुर की ऐतिहासिक विरासत किसी एक वर्ग या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे जौनपुर और देश की साझा धरोहर है। इसके नाम और इतिहास के साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।