Jaunpur news शादी की बुकिंग रद्द होने पर एडवांस नहीं लौटाना पड़ा भारी, उत्सव होटल को 27 हजार रुपये देने का आदेश

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शादी की बुकिंग रद्द होने पर एडवांस नहीं लौटाना पड़ा भारी, उत्सव होटल को 27 हजार रुपये देने का आदेश
छह माह पहले दी गई थी बुकिंग निरस्त करने की सूचना, कैश मेमो की एकतरफा शर्त को आयोग ने बताया अनुचित व्यापारिक व्यवहार
जौनपुर। हिमांशु श्रीवास्तव एडवोकेट
शादी समारोह की बुकिंग निरस्त होने के बाद अग्रिम जमा धनराशि वापस न करना उत्सव होटल के प्रोपराइटर एवं प्रबंधक को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने होटल प्रबंधन को परिवादी को 21 हजार रुपये की अग्रिम धनराशि लौटाने के साथ मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए तीन हजार रुपये तथा वाद व्यय के लिए तीन हजार रुपये, कुल 27 हजार रुपये 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह एवं सदस्य गीता ने मियांपुर निवासी चंद्र मोहन श्रीवास्तव की ओर से दाखिल परिवाद पर यह निर्णय सुनाया। परिवादी की पैरवी अधिवक्ता प्रशांत पंकज श्रीवास्तव ने की।
परिवाद के अनुसार, चंद्र मोहन श्रीवास्तव ने 7 मार्च 2021 को अपने पुत्र के विवाह समारोह के लिए वाजिदपुर तिराहा स्थित उत्सव होटल को 1 व 2 दिसंबर 2021 के लिए बुक कराया था। इसके एवज में उन्होंने 21 हजार रुपये अग्रिम जमा किए, जिसकी रसीद होटल प्रबंधन ने जारी की थी।
इसी बीच वधू के पिता की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो जाने के कारण उनकी इच्छा के अनुरूप विवाह की तिथि बदलकर 12 जुलाई 2021 कर दी गई और विवाह वधू के गृह जनपद बस्ती में संपन्न कराया गया। परिवादी ने बुकिंग निरस्त करने की सूचना 7 जुलाई 2021, यानी निर्धारित कार्यक्रम से लगभग छह माह पहले, होटल प्रबंधन को दे दी थी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि होटल प्रबंधन ने उसी तिथि पर किसी अन्य परिवार के विवाह समारोह के लिए होटल की बुकिंग कर दी और कार्यक्रम संपन्न भी कराया। इसके बावजूद परिवादी की अग्रिम धनराशि लौटाने से यह कहते हुए इंकार कर दिया गया कि कैश मेमो पर बुकिंग निरस्त होने की स्थिति में एडवांस वापस न करने की शर्त अंकित थी।
मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने 11 जुलाई 2024 को परिवाद निरस्त कर दिया था। इसके विरुद्ध परिवादी ने राज्य उपभोक्ता आयोग, लखनऊ में अपील दायर की। राज्य आयोग ने निचले आयोग का आदेश निरस्त करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर निर्णय देने का निर्देश दिया।
पुनः सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि होटल प्रबंधन ने अग्रिम धनराशि वापस न देकर सेवा में कमी (Deficiency in Service) की है। साथ ही कैश मेमो पर छपी यह शर्त कि “बुकिंग निरस्त होने पर अग्रिम राशि वापस नहीं होगी” पूरी तरह एकतरफा (One-sided) है, जो अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है। इसी आधार पर आयोग ने होटल के प्रोपराइटर एवं प्रबंधक को 21 हजार रुपये लौटाने के साथ 6 हजार रुपये अतिरिक्त क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का आदेश दिया।

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